पोकरण विधायक प्रतापपुरी का विवादित बयान, गोहत्या पर मुस्लिम समाज और कांग्रेस पर निशाना

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पोकरण विधायक प्रतापपुरी का विवादित बयान, गोहत्या पर मुस्लिम समाज और कांग्रेस पर निशाना

पोकरण में बैल की हत्या पर बीजेपी विधायक प्रतापपुरी के विवादित बयान

राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र में बैल को घसीटकर मारने की घटना के बाद बीजेपी विधायक और तारातरा मठ के महंत प्रतापपुरी ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गोहत्या करने वाले लोगों ने हिंदुओं का धर्म भ्रष्ट किया और गोमांस पर्यटकों व हिंदू समाज के लोगों तक पहुंचाया।

बैल को घसीटकर मारने की घटना और विधायक की प्रतिक्रिया

8 जनवरी की रात पोकरण के केलावा गांव के पास एक बैल को गाड़ी के पीछे बांधकर करीब एक से डेढ़ किलोमीटर तक घसीटा गया और बाद में उसकी हत्या कर उसे बूचड़खाने में बेचने का आरोप सामने आया। इस घटना के विरोध में 10 जनवरी को पोकरण बाजार बंद रखा गया और गोरक्षा संघर्ष समिति व हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया।

महंत प्रतापपुरी ने इस मामले पर कहा कि पोकरण में पाप का घड़ा भर गया था, जो अब फूट गया। उनके अनुसार, बैल बड़ा होने के कारण गाड़ी में नहीं आया, इसलिए उसे पीछे बांधकर घसीटा गया और हत्या के बाद होटल पर बेच दिया गया। उन्होंने इसे बड़ा कुकृत्य बताया और कहा कि स्थानीय लोगों ने संयम रखा, वरना स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

गोहत्या, धर्म भ्रष्ट करने और पर्यटकों को गोमांस खिलाने के आरोप

प्रतापपुरी ने दावा किया कि सीमांत क्षेत्र में असामाजिक गतिविधियां चल रही हैं और यहां आने वाले पर्यटकों को भी गोमांस खिलाया गया होगा। उन्होंने कहा कि रामदेवरा, तनोट और सम जैसे धार्मिक व पर्यटन स्थलों पर जाने वाले हिंदू भी मांस खाते हैं और उन्हें भी गोमांस खिलाकर उनका धर्म भ्रष्ट किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से कुछ दुकानों के आगे से भैंस, बैल और गाय जैसे पशुओं को उठाकर ले जाया जाता था, उन्हें काटा जाता था और जो लोग मांस खाते हैं, चाहे वे हिंदू हों, उन्हें भी गोमांस खिलाया गया होगा। प्रतापपुरी के अनुसार, ऐसे लोगों ने सबका धर्म भ्रष्ट कर दिया है और गोहत्या से बड़ी कोई हत्या नहीं होती।

भाजपा नेता की गिरफ्तारी और कांग्रेस पर हमला

इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों के कथित अवैध कब्जे हटवाए और 11 जनवरी को आरोपियों की परेड करवाई। केस में पुलिस ने भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष बासित खान को गिरफ्तार किया।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बैल को घसीटने के मामले में बीजेपी नेता की भूमिका रही है। इस पर प्रतापपुरी ने कांग्रेस की मानसिकता पर सवाल उठाए और कहा कि राजनीति करने के लिए कई मुद्दे हैं, लेकिन गोहत्या जैसे विषय पर राजनीति करना या लोगों को बरगलाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जो गोहत्यारा है, वह किसी का नहीं और यदि किसी का आचरण ठीक नहीं है तो न पार्टी और न ही जनता उसे स्वीकार करेगी।

गोमाता की महत्ता और धार्मिक संदर्भ

महंत प्रतापपुरी ने गाय को देवताओं से भी ऊपर बताया और कहा कि संतों ने भी माना है कि वे गाय से बड़े नहीं हैं। उन्होंने गोरक्त को मानव रक्त के समान बताते हुए कहा कि इतिहास में भी गोमांस से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन हुए हैं और समाज ने इसे गंभीरता से लिया है। प्रतापपुरी के अनुसार, ऐसे लोगों की पीठ ठोकना और उन्हें प्रोत्साहित करना भी बड़ा पाप है।

मदरसा शिक्षा, बाहरी प्रभाव और कट्टरवाद के आरोप

प्रतापपुरी ने यह भी कहा कि क्षेत्र में मुस्लिम समाज की पीढ़ियां बहुत पुरानी नहीं हैं और कई लोग कुछ पीढ़ी पहले तक हिंदू थे। उनके मुताबिक, मदरसे की शिक्षा और दूसरे प्रदेशों से आए लोगों के कारण यहां सौहार्द बिगड़ा और कट्टरवाद बढ़ा।

उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत दूसरी तरफ से होती है और हमारे धर्म व आस्था पर चोट पहुंचाई जाती है, जिसके जवाब में प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं। प्रतापपुरी ने कहा कि वे पिछले 30 साल से देख रहे हैं कि ऐसे कृत्य बंद नहीं हुए हैं और इससे हिंदू आस्था को ठेस पहुंची है।

‘घर वापसी’ की बात और मस्जिद निर्माण पर आपत्ति

महंत प्रतापपुरी ने कहा कि मुस्लिम यदि घर वापसी करना चाहें तो उनके लिए द्वार खुले हैं और पूरे देश में कई लोग ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने राजस्थान के काठा गांव सहित कुछ क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के लोगों के रीति-रिवाज और नाम अभी भी हिंदू परंपरा से जुड़े हैं और वे मजबूरी में मुस्लिम धर्म में गए थे।

उन्होंने दावा किया कि ऐसे क्षेत्रों में भी मस्जिद निर्माण का विरोध हो रहा है और कहा कि उनकी परंपरा के अनुसार मस्जिद की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने शेखावाटी क्षेत्र और कायमखानी समाज का भी उल्लेख किया और कहा कि वहां भी लोग सकारात्मक भाव से तैयार हैं।

कट्टरवाद छोड़ने और एकजुटता की अपील

प्रतापपुरी ने पूरे राजस्थान में वातावरण को अनुकूल बताते हुए ‘घर वापसी’ और परंपराओं के निर्वहन की बात दोहराई। उन्होंने उग्रवाद, अलगाववाद और कट्टरवाद को न बढ़ाने की अपील की और कहा कि यदि लोग राष्ट्र और धर्म की जड़ों से जुड़े रहें तो उनकी मान–सम्मान में कमी नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की कुछ छोटी जातियां, जो मुस्लिम समाज में चली गई थीं, आज भी वापस आने को तैयार हैं। प्रतापपुरी के अनुसार, यदि लोग कट्टरवाद चुनेंगे तो उन्हें उसके परिणाम भी भुगतने होंगे, लेकिन यदि वे एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण और धर्म की रक्षा में खड़े होंगे तो भविष्य बेहतर होगा।

इसी संदर्भ में पहले भी एक कार्यक्रम के दौरान महंत प्रतापपुरी का एक वीडियो चर्चा में रहा था, जिसमें उन्होंने एक सभा में लोगों से जाति पूछकर हाथ खड़े करवाए थे और मुस्लिम सरपंच से मुसलमान बने रहने की अवधि के बारे में सवाल किया था।

Arvind Vishwakarma