उत्तराखंड के चारधाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन की तैयारी, सरकार कर रही कानून का अध्ययन

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उत्तराखंड के चारधाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन की तैयारी, सरकार कर रही कानून का अध्ययन

उत्तराखंड के चारधाम और 50 मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश प्रतिबंध का प्रस्ताव

उत्तराखंड के चारधाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत कुल 50 मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी चल रही है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी), गंगोत्री और यमुनोत्री धाम मंदिर समितियों ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किए हैं, जिन्हें अब बोर्ड बैठकों और सरकारी प्रक्रिया से गुजरना है।

मंदिर समितियों की ओर से प्रतिबंध के प्रस्ताव

बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बद्रीनाथ, केदारनाथ और समिति के अधीन आने वाले अन्य सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। इस बैठक में तीर्थ पुरोहितों और धर्माधिकारियों की भी भागीदारी होगी। चारधाम के अलावा समितियों के अधीन 46 अन्य मंदिरों के लिए भी इसी प्रकार के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं।

गंगोत्री मंदिर समिति पहले ही अपनी बैठक में सर्वसम्मति से गंगोत्री धाम के मंदिर और गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव पर सहमत हो चुकी है। वहीं, यमुनोत्री धाम मंदिर समिति गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन को लेकर तैयार प्रस्ताव को जल्द लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कह चुकी है।

किस पर लागू नहीं होगा प्रतिबंध

गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने स्पष्ट किया कि सिख धर्म के अनुयायी हिंदू धर्म की ही एक शाखा माने जाते हैं, इसलिए उन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव पुरुषोत्तम उनियाल ने भी कहा कि हिंदू धर्म की शाखाओं में आने वाले अनुयायियों पर यह बैन लागू नहीं होगा।

गैर-हिंदू की परिभाषा और सनातन आस्था

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि गैर-हिंदू से आशय उन लोगों से है, जिनकी सनातन धर्म में आस्था नहीं है। उनके मुताबिक जो लोग सनातन परंपरा में विश्वास रखते हैं, उनके लिए केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम खुले रहेंगे।

मुख्यमंत्री धामी का रुख और कानूनी अध्ययन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि धामों के संचालन से जुड़े धार्मिक संगठनों, तीर्थ पुरोहितों और संत समाज की राय के आधार पर ही सरकार आगे का निर्णय लेगी। उन्होंने बताया कि इन स्थलों के लिए पहले से बने कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है और उसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

1939 के कानून के तहत मंदिर समिति के अधिकार

श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन ‘द यूपी श्री बद्रीनाथ एंड श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट 1939’ के तहत किया गया था। यह कानून मंदिरों के बेहतर प्रशासन और प्रबंधन के लिए बनाया गया था। इसी अधिनियम में समिति की संरचना, अधिकार, मंदिर संचालन, व्यवस्था बनाए रखने और नियम बनाने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, जिनके आधार पर समिति मंदिरों के प्रशासन और व्यवस्था पर निर्णय लेती है।

बायलॉज, सरकारी पुष्टि और लागू करने की प्रक्रिया

1939 के अधिनियम के अनुसार समिति को बायलॉज बनाने का अधिकार है, जिनके माध्यम से मंदिर के अंदर व्यवस्था, संचालन और प्रवेश से जुड़े नियम तय किए जा सकते हैं। हालांकि, इन बायलॉज को प्रभावी करने के लिए उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रकाशित करना और राज्य सरकार से पुष्टि प्राप्त करना आवश्यक है। इसलिए केवल प्रस्ताव पास हो जाना अंतिम कदम नहीं माना जाएगा; नियमों को लागू करने की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

श्रद्धालुओं की संख्या और संभावित असर

केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। 2025 के यात्रा सीजन में रिपोर्ट के अनुसार केदारनाथ धाम में 16,56,539 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि बद्रीनाथ धाम में करीब 16.5 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इन धामों से जुड़ा कोई भी निर्णय केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे देश के यात्रियों को प्रभावित करता है।

यात्रियों की चिंता और आगे की स्थिति

देशभर, खासकर बिहार समेत कई राज्यों से श्रद्धालु इन धामों की यात्रा के लिए महीनों पहले ट्रेन और फ्लाइट टिकट, होटल और अन्य इंतजाम कर लेते हैं। गैर-हिंदू एंट्री बैन की चर्चा के बाद यात्रियों में असमंजस स्वाभाविक है। फिलहाल स्थिति यह है कि बोर्ड बैठकों में प्रस्तावों पर चर्चा और पारित होना बाकी है। यात्रियों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्ताव पास होने के बाद उन्हें किस रूप में लागू किया जाता है और प्रशासनिक स्तर पर आगे क्या निर्णय लिए जाते हैं।

Gulzar Ahmad