अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर का इस्तीफा, शंकराचार्य की टिप्पणी से आहत
योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी को बताया असहनीय
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तैनात GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी से आहत होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राज्यपाल को इस्तीफा भेजते हुए कहा कि वे जिस प्रदेश का नमक और रोटी खाते हैं, उसके मुखिया के खिलाफ असंसदीय भाषा बर्दाश्त नहीं कर सकते।
भावुक होकर पत्नी से की बातचीत, निर्णय को बताया आत्ममंथन का नतीजा
48 वर्षीय प्रशांत कुमार सिंह ने इस्तीफा भेजने के बाद पत्नी से फोन पर बात करते हुए भावुक हो गए और रो पड़े। उन्होंने कहा कि वे पिछले दो दिनों से इस पीड़ा को सहन नहीं कर पा रहे थे और दो रातों से सो नहीं पाए। प्रशांत ने बताया कि उनकी दो छोटी बेटियां हैं और वे चाहते हैं कि बच्चे यह देखें कि उनके पिता ने सही और गलत के बीच खड़े होने में डर नहीं दिखाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी आवेग में नहीं, बल्कि लंबे आत्ममंथन के बाद लिया गया है।
सरकारी सेवा, जिम्मेदारी और विरोध की मर्यादा पर बयान
प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि जब तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं होता, वे अपना सरकारी काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे प्रदेश के वेतन से अपना परिवार चलाते हैं और उसी सरकार के तहत काम करते हैं, इसलिए प्रदेश के नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक बातें होते देख चुप रहना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग समाज में गलत माहौल बनाकर जातीय विभाजन बढ़ा रहे हैं और ऐसे बयानों का उन्होंने विरोध किया। साथ ही उन्होंने कहा कि संविधान में विरोध का तरीका तय है, लेकिन पालकी या ठेला गाड़ी पर बैठकर मुख्यमंत्री को उल्टा-सीधा कहना उचित नहीं है।
सेवा पृष्ठभूमि और अधिकारियों की कोशिशें
प्रशांत कुमार सिंह मूल रूप से मऊ जिले के सरवा गांव के रहने वाले हैं। उनकी पहली नियुक्ति सहारनपुर में हुई थी। इसके बाद वे कानपुर में असिस्टेंट कमिश्नर रहे और 21 अक्टूबर 2023 को उनकी पोस्टिंग अयोध्या में हुई थी। इस्तीफे के बाद उनसे बातचीत के लिए GST अपर आयुक्त संतोष कुमार, एडीएम और एसपी सिटी उनके कार्यालय पहुंचे।
दो दिनों में दो अफसरों के इस्तीफे
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद के बीच यह उत्तर प्रदेश में दो दिनों में दूसरा बड़ा इस्तीफा है। इससे पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह UGC का नया कानून और अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई को बताया था। उनके इस्तीफे के बाद शासन ने उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं और उन्हें शामली में अटैच किया गया है। उनका इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं किया गया है।
शंकराचार्य की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने 21 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने मुख्यमंत्री को हिंदू कहने योग्य नहीं बताया और उनकी तुलना ऐतिहासिक शासकों अकबर और औरंगजेब से की। वाराणसी में कथित रूप से तोड़े गए मंदिरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 150 से अधिक मंदिर तोड़े गए, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए एक शब्द तक नहीं बोला और पौराणिक मूर्तियों से अधिक मुख्यमंत्री की गद्दी को महत्व दिया।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया और राजनीति की हलचल
GST डिप्टी कमिश्नर के इस्तीफे पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोई भी अधिकारी सरकार का नमक नहीं खाता, बल्कि जनता के टैक्स से वेतन प्राप्त करता है, इसलिए अधिकारियों को सरकार नहीं, जनता का वफादार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि अधिकारी सरकार के गलत कार्यों को छिपाने या उसके समर्थन में इस तरह काम करते हैं तो यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
निष्कर्ष: प्रशासन, साधु-संत और राजनीति के बीच टकराव
अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की टिप्पणी और बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के समानांतर घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। एक ओर अधिकारी अपनी संवेदनशीलता और नैतिकता का हवाला देकर पद छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल इसे जनता और सरकार के बीच जवाबदेही के सवाल से जोड़कर देख रहे हैं। मामला अब केवल बयानबाजी तक सीमित न रहकर प्रशासनिक निर्णयों और सरकारी तंत्र की निष्पक्षता पर भी बहस का विषय बन गया है।
Adarsh Chaurasiya