लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल से पीएम मोदी का जातीय समीकरण और राष्ट्रवाद पर जोर
लखनऊ स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक पितृ पुरुषों और विभिन्न समुदायों के महापुरुषों का स्मरण करते हुए राष्ट्रवाद और जातीय एकता का संदेश दिया। यह कार्यक्रम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी महोत्सव के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्रप्रेम की थीम प्रमुख रूप से उभरी।
अटल, दीनदयाल और श्यामा प्रसाद की प्रतिमाओं के साए में संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य प्रतिमाओं की छांव में बने मंच से लोगों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में हर कदम राष्ट्र के लिए समर्पित करने की बात कही और राष्ट्रप्रेम को कार्यक्रम के केंद्र में रखा। परिसर में उपस्थित लोगों के हाथों में तिरंगा नजर आया और वंदे मातरम, भारत माता की जय तथा जय श्रीराम के नारों से माहौल राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत रहा।
बिजली पासी के उल्लेख से पासी समाज को संदेश
कार्यक्रम में पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराजा बिजली पासी को योद्धा के रूप में याद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे आगे बढ़ाते हुए बिजली पासी को वीरता और सुशासन का प्रतीक बताया। उन्होंने 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित मदन मोहन मालवीय के साथ बिजली पासी के जन्मदिन का भी उल्लेख किया और कहा कि उनका किला इसी क्षेत्र के पास स्थित है। मोदी ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी ने बिजली पासी पर डाक टिकट जारी कराया था।
आदिवासी, राजभर और अन्य समुदायों तक संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भगवान बिरसा मुंडा की तस्वीर लगाने की बात कहकर आदिवासी समुदाय को संदेश देने की कोशिश की। साथ ही, उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माने जा रहे राजभर समाज को साधने के लिए राजा सुहेलदेव के नाम पर बने स्मारक का जिक्र किया। अयोध्या में भगवान श्रीराम के साथ निषादराज के मंदिर की बात करके उन्होंने एक बड़े वर्ग से भावनात्मक जुड़ाव का संकेत दिया।
बलिदानियों और महापुरुषों के जरिए जातीय स्वाभिमान पर बल
मोदी ने राजा महेंद्र सिंह और चौरी चौरा के बलिदानियों को याद करते हुए उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने इन संदर्भों के माध्यम से जातीय स्वाभिमान को रेखांकित करने के साथ-साथ राष्ट्रवाद को भी मजबूत रूप में सामने रखा। इस दौरान मंच से दिए गए संदेशों में विभिन्न जातीय समूहों और समुदायों के महापुरुषों को सम्मान देने पर विशेष जोर रहा।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और वंदे मातरम पर फोकस
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की थीम प्रमुख रही। हाल के दिनों में संसद में वंदे मातरम को लेकर हुई राजनीतिक बहस की पृष्ठभूमि में, इस मुद्दे पर भाजपा द्वारा किए जा रहे प्रयासों की झलक भी दिखाई दी। प्रेरणा स्थल पर वातावरण राष्ट्रगीत और राष्ट्रनाद के नारों से गूंजता रहा, जबकि मंच से दिए गए संबोधनों में जातीय समीकरण मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित रहा।
गैर-भाजपा नेताओं का उल्लेख कर व्यापक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का भी उल्लेख किया। इसके साथ ही पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और तरुण गोगोई को राष्ट्रीय पुरस्कार देने की बात कही। इस पहल के माध्यम से उन्होंने गैर-भाजपा दलों के समर्थकों तक पहुंचने और व्यापक राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया।
कुल मिलाकर यह कार्यक्रम अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी महोत्सव के साथ-साथ भाजपा के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, जातीय समीकरण और व्यापक राजनीतिक संदेशों का संयोजन बनकर सामने आया, जिसमें महापुरुषों के सम्मान के माध्यम से विभिन्न समुदायों तक पहुंचने की कोशिश स्पष्ट दिखाई दी।
Lokendra Mishra