राबड़ी आवास आधी रात में खाली, लालू-तेजस्वी दिल्ली में, भावनात्मक रिश्ता टूटा

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राबड़ी आवास आधी रात में खाली, लालू-तेजस्वी दिल्ली में, भावनात्मक रिश्ता टूटा

आधी रात में पटना का राबड़ी आवास खाली, लालू परिवार को नोटिस के बाद शिफ्टिंग

पटना में 10 सर्कुलर रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास देर रात को खाली कराया जा रहा है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस समय दिल्ली में हैं। इस बीच 3 से 4 छोटी गाड़ियां राबड़ी आवास पहुंची हैं, जिनसे सामान को पटना के गोला रोड स्थित गौशाला में शिफ्ट किया जा रहा है।

20 साल बाद सरकारी आवास खाली करने का नोटिस

करीब 20 वर्ष बाद लालू प्रसाद यादव के परिवार को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिला है। लगभग 30 दिन पहले बिहार भवन निर्माण विभाग ने यह नोटिस जारी किया था। विभाग के आदेश में कहा गया कि बिहार विधान परिषद के आवासन के लिए पटना केन्द्रीय पुल की आवास संख्या 39, हार्डिंग रोड अलॉट की गई है।

नोटिस पर लालू परिवार की राजनीतिक नाराजगी

सरकारी नोटिस के खिलाफ लालू परिवार ने खुलकर नाराजगी जताई है। तेजप्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि छोटे भाई ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बड़े भाई का बंगला खाली कराने का आदेश दे दिया। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद और उनका परिवार अब 10 सर्कुलर रोड वाले बंगले में नहीं रहेगा।

तेजप्रताप के अनुसार, पिछले 28 साल से इस आवास से बिहार और राजद के लाखों कार्यकर्ताओं का भावनात्मक रिश्ता जुड़ा रहा, जिसे एक सरकारी नोटिस के जरिए खत्म कर दिया गया। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि इस घर के जाने के साथ ही नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के बीच के भाइचारे जैसे नैतिक रिश्ते का अंत हो गया।

राबड़ी आवास से बेटियों का भावुक विदाई

नोटिस के बाद परिवार के भीतर भी भावनात्मक तनाव सामने आया। 15 नवंबर को लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या राबड़ी आवास से रोते-रोते निकली थीं। इसके कुछ समय बाद लालू की तीन और बेटियों ने भी यह आवास छोड़ दिया।

रोहिणी आचार्या ने पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से कहा था कि उनका कोई परिवार नहीं है और उन्हें परिवार से निकाला गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी की स्थिति पर दुनिया सवाल कर रही है, लेकिन जिम्मेदारी कोई नहीं ले रहा। उन्होंने तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव और रमीज पर दबाव बनाने के आरोप लगाए और कहा कि अब सवाल तेजस्वी से पूछा जाना चाहिए, लेकिन सवाल पूछने पर गाली देने या चप्पल से मारने जैसी बातें की जाती हैं।

तेजप्रताप की दूरी और वर्तमान निवास

समाचार के अनुसार, तेजप्रताप यादव को लालू प्रसाद पहले ही पार्टी और परिवार से बाहर कर चुके हैं। इसके बाद से वे अपने ही एक सरकारी आवास में अलग रह रहे हैं। वहीं राबड़ी आवास में फिलहाल लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और उनकी फैमिली रह रहे थे।

राबड़ी आवास का राजनीतिक इतिहास

राबड़ी आवास का इतिहास लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की राजनीति से गहराई से जुड़ा है। 23 जून 1997 को चारा घोटाला मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद सहित 55 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और उनके खिलाफ 63 केस दर्ज हुए। गिरफ्तारी तय मानते हुए लालू ने 25 जुलाई 1997 की शाम मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया और अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनवाया।

बाद में वंशवाद के सवाल पर लालू प्रसाद ने कहा था कि वे राजनीति में शक्ति अर्जित करने आए हैं और केवल आरोपों के कारण सत्ता नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने पूछा था कि पत्नी को मुख्यमंत्री बनाकर उन्होंने कौन सी गलती की और क्या वे अपनी सत्ता राजनीतिक विरोधियों के हाथों में सौंप देते।

राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाने के बाद 30 जुलाई 1997 को लालू प्रसाद ने चारा घोटाला मामले में सरेंडर किया और दिसंबर 1997 तक जेल में रहे। इस दौरान वे राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहे। इसके बाद 2005 में राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित यही सरकारी आवास अलॉट किया गया था, जिसे अब खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है।

राबड़ी आवास खाली होने का राजनीतिक और भावनात्मक अर्थ

राबड़ी आवास को राजद और उसके कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रतीकात्मक केंद्र माना जाता रहा है। यही से पार्टी की कई राजनीतिक गतिविधियां और निर्णय जुड़े रहे हैं। अब आधी रात में चल रही शिफ्टिंग और सरकारी आदेश के बाद इसे खाली करने की प्रक्रिया से न केवल परिवार के लिए, बल्कि पार्टी समर्थकों के लिए भी भावनात्मक और राजनीतिक दोनों तरह की चर्चा तेज हो गई है।

फिलहाल, आवास से सामान को गोला रोड स्थित गौशाला में ले जाया जा रहा है और आगे परिवार के नए ठिकाने और राजनीतिक संदेशों को लेकर बहस जारी रहने की संभावना है।

L. N. Bhargava