राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और विधायकों की अनुपस्थिति, ओडिशा-बिहार में कांग्रेस को झटका, NDA को लाभ

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राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और विधायकों की अनुपस्थिति, ओडिशा-बिहार में कांग्रेस को झटका, NDA को लाभ

हरियाणा, बिहार और ओडिशा में राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग और अनुपस्थिति से NDA को बहुमत की उम्मीद

सोमवार को हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान हुआ, जिसमें कई चौंकाने वाले घटनाक्रम सामने आए। इन चुनावों में क्रॉस वोटिंग और कुछ विधायकों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी, जिसका सीधा फायदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मिलता दिख रहा है।

राज्यों में मतदान और आरोप-प्रत्यारोप

ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा और बीजद विधायकों के बीच झड़प देखने को मिली। कांग्रेस ने अपने तीन विधायकों – दाशरथी गमांग, सोफिया फिरदोस और रमेश जेना – पर पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने का आरोप लगाया। कुल मिलाकर, ओडिशा में पांच विधायकों (तीन कांग्रेस और दो बीजद) ने क्रॉस वोटिंग की। यहां चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में थे, जिसमें चौथी सीट पर मुकाबला कड़ा रहा।

बिहार में, महागठबंधन के चार विधायकों (तीन कांग्रेस और एक राष्ट्रीय जनता दल) ने मतदान नहीं किया। एनडीए के सभी 202 विधायकों ने वोट डाले, जबकि महागठबंधन की तरफ से केवल 37 विधायकों ने मतदान किया। एनडीए को यहां पांचों सीटें जीतने की उम्मीद है। राष्ट्रीय जनता दल ने अपनी संख्या बल बढ़ाने के लिए एआईएमआईएम और बसपा के विधायकों का समर्थन हासिल किया।

हरियाणा में, कुल 90 में से 88 विधायकों ने वोट डाला। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के दोनों विधायकों, अर्जुन चौटाला और आदित्य देवीलाल, ने मतदान से दूरी बनाई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पहला वोट डाला। कांग्रेस यहां क्रॉस वोटिंग को लेकर आशंकित थी, जैसा कि अतीत में भी हो चुका है।

NDA को राज्यसभा में बहुमत का फायदा

इन चुनावों के बाद, एनडीए को राज्यसभा में कुल 8 सीटों का फायदा होने का अनुमान है, जिससे सदन में उसकी कुल संख्या 129 तक पहुंच सकती है। राज्यसभा की कुल 245 सीटों में बहुमत के लिए 122 सीटों की आवश्यकता होती है। इस बढ़त के साथ, एनडीए अब ऊपरी सदन में भी बहुमत हासिल करता दिख रहा है, जिससे उसके विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में आसानी होगी।

राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया अप्रत्यक्ष होती है, जिसमें विधायक मतदान करते हैं। हर दो साल में इसके एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। जीत के लिए आवश्यक वोटों का कोटा विधायकों की कुल संख्या और रिक्त सीटों के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

Satyam Tripathi