राम मंदिर चंदा विवाद: इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा संग्रह को लेकर उत्पन्न विवाद पर इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि चंदा संग्रह के दौरान साम्प्रदायिक हिंसा हुई और प्रशासन ने उचित कदम नहीं उठाए।
सुनवाई के दौरान दिग्विजय सिंह का पक्ष
गुरुवार को करीब आधे घंटे चली सुनवाई में दिग्विजय सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण के पवित्र कार्य का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन चंदा संग्रह स्वैच्छिक हो। उन्होंने अल्पसंख्यकों पर दबाव और हिंसा फैलाने की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
साम्प्रदायिक घटनाओं पर प्रशासन की लापरवाही
दिग्विजय सिंह ने 2020 में इंदौर के चंदनखेड़ी विवाद का उदाहरण देते हुए पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। साथ ही, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को लागू करने और सरकार से स्टेटस रिपोर्ट जारी करने की मांग की।
याचिका का उद्देश्य
पूर्व मुख्यमंत्री ने 2021 में यह याचिका लगाई थी, जिसमें चंदा संग्रह के कारण होने वाली सांप्रदायिक घटनाओं पर नियंत्रण की बात कही गई थी। उन्होंने प्रशासन और सरकार की विफलता पर सवाल उठाते हुए चंदा संग्रह को सौहार्दपूर्ण वातावरण में करने की अपील की।
दिग्विजय सिंह का योगदान
उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 1,11,111 रुपये का चेक भी भेजा था। साथ ही, विश्व हिंदू परिषद से पुराने चंदे का लेखा-जोखा जनता के सामने प्रस्तुत करने की मांग की।
न्यायालय का निर्णय
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले को हियर्ड एंड रिजर्व में रख लिया है। याचिका में मप्र शासन, गृह विभाग, डीजीपी समेत कई अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
दिग्विजय सिंह ने इस मामले में न्यायालय से पुलिस-प्रशासन को चार बिंदुओं का पालन करने की अपील की है।
Navjeet Kaur