रामभद्राचार्य के बयान पर संतों में नाराजगी
प्रेमानंद महाराज की भक्ति पर उठे सवाल
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने संत प्रेमानंद महाराज को संस्कृत ज्ञान के मामले में चुनौती दी, जिससे साधु-संतों में असंतोष फैल गया। उन्होंने प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता को क्षणभंगुर बताया और उनकी भक्ति पर सवाल उठाए।
संतों का समर्थन और आलोचना
मधुसूदन दास और अन्य संतों ने रामभद्राचार्य के बयान को निंदनीय बताते हुए कहा कि भक्ति भाषा से परे होती है। उन्होंने प्रेमानंद महाराज के सद्मार्ग पर युवाओं को लाने और समाज में पाखंड का विरोध करने की सराहना की।
प्रेमानंद महाराज के योगदान पर जोर
प्रेमानंद महाराज को दिव्य संत बताते हुए धर्माचार्यों ने कहा कि उनकी भक्ति और सेवा का प्रभाव विश्वभर में है। उनकी आलोचना को संत परंपरा के खिलाफ बताया गया। संतों ने रामभद्राचार्य से अपने बयान पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।