राष्ट्रपति मुर्मू पहली बार लड़ाकू हेलिकॉप्टर प्रचंड में भरेंगी उड़ान, वायु शक्ति युद्धाभ्यास का जायजा
सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 फरवरी को राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े युद्धाभ्यास 'वायु शक्ति-2026' में शामिल होंगी। अपने दो दिवसीय जैसलमेर दौरे पर, वे युद्धाभ्यास का जायजा लेने के लिए स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर (LCH) 'प्रचंड' में उड़ान भरेंगी। यह पहली बार होगा जब राष्ट्रपति किसी लड़ाकू हेलिकॉप्टर की सह-पायलट बनकर सीमावर्ती एयरस्पेस में उड़ान भरेंगी। इसके बाद वे वायुसेना स्टेशन पर अधिकारियों और जांबाजों से संवाद कर उनका हौसला बढ़ाएंगी।
'वायु शक्ति-2026' में स्वदेशी मारक क्षमता का प्रदर्शन
'वायु शक्ति-2026' युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करेगी, जिसमें आसमान से बरसती आग और सटीक निशाने शामिल होंगे। इस दौरान राफेल, सुखोई-30 MKI, अपाचे, C-130J सुपर हरक्यूलिस और स्वदेशी 'तेजस' और 'प्रचंड' जैसे विमान अपनी ताकत दिखाएंगे। इस अभ्यास से दुनिया को यह संदेश दिया जाएगा कि भारतीय वायुसेना अंधेरे में भी सटीक प्रहार करने में सक्षम है। अभ्यास में लगभग 12 हजार किलोग्राम गोला-बारूद का इस्तेमाल किया जाएगा और 77 फाइटर जेट तथा 43 हेलिकॉप्टर तैनात किए जाएंगे। यह भारत की आत्मनिर्भरता और सामरिक शक्ति का एक मजबूत संदेश देगा।
राष्ट्रपति मुर्मू का भारतीय वायुसेना से गहरा संबंध
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भारतीय वायुसेना के विमानों से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने पहले भी फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स में उड़ान भरी है, जिसमें 29 अक्टूबर, 2025 को राफेल और 8 अप्रैल, 2023 को असम के तेजपुर बेस से सुखोई-30 MKI में करीब 30 मिनट की उड़ान शामिल है। वह दो अलग-अलग लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति हैं और सुखोई में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। उनकी यह यात्रा देश के जवानों का हौसला बढ़ाने और भारतीय वायुसेना की तैयारियों का जायजा लेने के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
युद्धाभ्यास क्षेत्र में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और चांधन से लेकर पोकरण तक पूरे इलाके को 'नो फ्लाई जोन' घोषित कर दिया गया है। शाम को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में 'वायु शक्ति' युद्धाभ्यास की शुरुआत होगी। यह अभ्यास 'आत्मनिर्भर भारत' की ताकत को प्रदर्शित करेगा और आधुनिक हथियार प्रणालियों तथा स्वदेशी रक्षा उपकरणों के दम पर वायुसेना की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाएगा।
Sharad Shrivastava