राष्ट्रपति-राज्यपाल की मंजूरी पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी

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राष्ट्रपति-राज्यपाल की मंजूरी  पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी

राष्ट्रपति और राज्यपाल की मंजूरी पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी

सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति और राज्यपाल की मंजूरी की डेडलाइन तय करने के मामले पर सुनवाई हो रही है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली 5-जजों की संविधान पीठ कर रही है। अन्य जजों में जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर शामिल हैं।

चीफ जस्टिस ने संविधान की अहमियत पर दिया जोर

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बीआर गवई ने भारत के संविधान की सराहना करते हुए कहा कि हमें अपने संविधान पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों की राजनीतिक स्थिति का उल्लेख करते हुए इसे भारत के संविधान के मजबूत ढांचे का प्रमाण बताया।

राज्यों और केंद्र की दलीलें

तेलंगाना, तमिलनाडु, और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने राज्यपालों को विधेयकों पर तुरंत निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि राज्यपालों के पास विधायी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। वहीं, केंद्र सरकार ने कहा कि इस मामले में संवाद और बातचीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

संविधान के तहत राज्यपाल की भूमिका

तमिलनाडु सरकार ने तर्क दिया कि राज्यपाल को केवल विधेयकों पर हस्ताक्षर करने का अधिकार होना चाहिए, जबकि केंद्र का कहना है कि अदालतें इस मुद्दे पर समय-सीमा तय नहीं कर सकतीं।

इस मामले की पृष्ठभूमि में तमिलनाडु में राज्यपाल और सरकार के बीच विधेयक पर विवाद है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यह स्पष्ट किया है कि राज्यपाल के पास वीटो पावर नहीं है और उन्हें विधेयकों पर शीघ्रता से निर्णय लेना चाहिए।

यह मामला संविधान की व्याख्या और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सुधार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय इस मामले में भविष्य में राज्यपाल और राष्ट्रपति की भूमिका को स्पष्ट करेगा।