रोहतास में BJP को बड़ा झटका, सातों सीटें सहयोगी दलों को सौंपीं
रोहतास जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पहली बार ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपनी सभी सात विधानसभा सीटें सहयोगी दलों को सौंप दी हैं। इस निर्णय से स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी और तनाव पैदा हुआ है।
ईवीएम से गायब हुआ 'कमल'
इस फैसले के बाद रोहतास की ईवीएम में मतदाताओं को भाजपा का पारंपरिक चुनाव चिन्ह 'कमल' नहीं दिखेगा। जिले में काराकाट, नोखा और करगहर सीटें जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को दी गई हैं, जबकि सासाराम और दिनारा सीटें राष्ट्रीय लोक मोर्चा को मिली हैं। वहीं, चेनारी (सु.) और डेहरी सीटें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को सौंपी गई हैं।
स्थानीय कार्यकर्ताओं में हताशा
स्थानीय कार्यकर्ता इस फैसले से बेहद हताश हैं। पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। सासाराम और नोखा जैसी परंपरागत मजबूत सीटों को भी छोड़ देने पर रोहतास में भाजपा कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी है। पूर्व जिलाध्यक्ष प्रमोद सिंह और अन्य नेताओं ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं।
बड़े नेताओं के बावजूद जिले को सीट नहीं
रोहतास जिला भाजपा के कई बड़े नेता, जैसे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह और विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, के यहां होने के बावजूद जिले को एक भी विधानसभा सीट नहीं मिलना स्थानीय संगठन के मनोबल पर गहरा असर डाल रहा है।
आगे की रणनीति पर विचार
इस निर्णय के बाद निचले स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति है। आगामी दिनों में कार्यकर्ताओं द्वारा बुलाई जाने वाली पंचायतें यह तय करेंगी कि यह सन्नाटा शीर्ष नेतृत्व के फैसले को स्वीकारने का संकेत है या राजनीतिक समीकरणों की भेंट चढ़ी संगठन की उपेक्षा के कारण एक बड़े विद्रोह की शुरुआत।
Bhavanesh Soni