रतलाम इंडस्ट्रियल एरिया में क्लोरीन गैस लीकेज, 5 घायल और 10 फैक्ट्रियां बंद

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रतलाम इंडस्ट्रियल एरिया में क्लोरीन गैस लीकेज, 5 घायल और 10 फैक्ट्रियां बंद

रतलाम के जावरा इंडस्ट्रियल एरिया में क्लोरीन गैस लीक, पांच लोग घायल

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा इंडस्ट्रियल एरिया में शनिवार शाम फेरिक सल्फेट पाउडर बनाने वाली एक फैक्ट्री में क्लोरीन गैस का रिसाव होने से बड़ा हादसा टलते-टलबच गया। इस घटना में पांच लोग घायल हो गए, जिन्हें सांस लेने में दिक्कत, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत के बाद अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

पुराने सिलेंडर से गैस रिसाव, इलाके में अफरातफरी

जानकारी के अनुसार, लगभग 20 साल पुराने क्लोरीन गैस सिलेंडर में अचानक लीकेज हो गया। गैस तेजी से फैलने लगी और पूरा इलाका धुंध जैसी परत से घिर गया। इंडस्ट्रियल एरिया में भगदड़ जैसे हालात बन गए और मजदूर जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ते नजर आए।

गैस के फैलाव के कारण आसपास की कई फैक्ट्रियों को तुरंत खाली कराया गया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर करीब 10 फैक्ट्रियों में काम बंद करवाकर वहां काम करने वाले कर्मचारियों को घर भेज दिया। घटना के समय प्लांट में तीन कर्मचारी मौजूद थे, जबकि फैक्ट्री का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं था।

दमकलकर्मी और अन्य कर्मचारी भी प्रभावित, एक की हालत गंभीर

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और पानी का छिड़काव कर लीकेज को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू की। इसी दौरान तीन दमकलकर्मी पुष्कर देवरिया, बालाराम गेहलोत और कुलदीप गेहलोत गैस की चपेट में आकर बीमार हो गए। इन्हें प्राथमिक उपचार के बाद रतलाम रेफर किया गया।

पास की एक अन्य इकाई के दो कर्मचारी भी गैस से प्रभावित हुए। सभी को सांस लेने में परेशानी, उल्टी और चक्कर जैसी समस्याओं के साथ सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। गैस की चपेट में आए एक मजदूर की स्थिति गंभीर है और वह अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट पर है, जबकि अन्य मजदूरों का उपचार जारी है।

राहत-बचाव में प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम सक्रिय

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया। एसडीआरएफ की टीम भी बचाव कार्य में जुट गई। प्रशासन ने पूरे इलाके को सुरक्षा की दृष्टि से घेराबंदी कर स्थिति पर नजर रखी।

कलेक्टर मिशा सिंह ने बताया कि फैक्ट्री में छोटा क्लोरीन टैंक था, जिसे तकनीकी टीम ने बंद कर दिया है और गैस रिसाव पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। उनके अनुसार, इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, जांच के आदेश

घटना के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि फेरिक सल्फेट फैक्ट्री में क्लोरीन गैस का सिलेंडर क्यों रखा गया था और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा था। प्रशासन ने इन सभी बिंदुओं पर जांच शुरू कर दी है।

विधायक राजेंद्र पाण्डेय मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सुरक्षा प्रबंधन की गहन जांच के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

फिलहाल प्रशासन, तकनीकी टीम और राहत एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि प्रभावित मजदूरों और दमकलकर्मियों का उपचार जारी है।

Lokendra Mishra