रूस का भीषण हमला, वार्ता बेनतीजा, यूरोप-अमेरिका में अविश्वास

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रूस का भीषण हमला, वार्ता बेनतीजा, यूरोप-अमेरिका में अविश्वास

रूस-यूक्रेन युद्ध में भीषण हवाई हमले और बेनतीजा कूटनीति

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेजी से भड़क उठा है। यूक्रेन में आर्म्ड फोर्सेज डे से ठीक पहले रूस ने बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें ड्रोन, मिसाइल और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया। साथ ही युद्ध रोकने के लिए चल रही अमेरिका-यूक्रेन वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई, जबकि यूरोपीय देशों में अमेरिका की भूमिका और रूस की नीयत को लेकर गहरा अविश्वास दिखा।

रूस के सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमले

यूक्रेनी एयरफोर्स के अनुसार, रूस ने शनिवार को 29 ठिकानों पर 653 ड्रोन और 51 मिसाइलें दागीं। इनमें से यूक्रेन ने 585 ड्रोन और 30 मिसाइलें मार गिराने का दावा किया, हालांकि हमलों में कम से कम 8 लोग घायल हुए और कई ऊर्जा स्टेशन तथा रेलवे ढांचे को नुकसान पहुंचा।

हमलों के कारण जापोरेजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट कुछ समय के लिए बाहरी बिजली सप्लाई से कट गया। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, प्लांट के रिएक्टर फिलहाल बंद होने के कारण तत्काल परमाणु संकट नहीं पैदा हुआ, लेकिन ईंधन को ठंडा रखने के लिए लगातार बिजली की जरूरत बनी हुई है। प्लांट पर अभी भी रूसी सेना का कब्जा है।

रूस की ‘फ्रेंडली फायर’ गलती: अपने ही शहर पर बम

मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि यूक्रेन पर हमले के दौरान रूस ने गलती से अपने ही शहर बेल्गोरोड पर FAB-1000 हाई-एक्सप्लोसिव बम गिरा दिया। यह शहर यूक्रेन सीमा से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित है। लगभग 1000 किलोग्राम वजन वाले इस बम का विस्फोट पूरी तरह नहीं हुआ, लेकिन जमीन पर भारी धमाका होने से एक बड़ा गड्ढा बन गया। इस घटना की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

यूक्रेन के जवाबी ड्रोन हमले और रूसी तेल पर वार

रूस ने यह भी दावा किया कि उसने रातभर में 116 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। दूसरी ओर, यूक्रेन ने रूस के रयाजान तेल रिफाइनरी पर लंबी दूरी के ड्रोन से हमला किया, जिसकी पुष्टि यूक्रेनी सेना और रूसी क्षेत्रीय अधिकारियों दोनों ने की।

पिछले कुछ महीनों से यूक्रेन लगातार रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले तेज कर रहा है, ताकि रूस के तेल निर्यात से होने वाली आय को कम किया जा सके। यूक्रेन और अमेरिका का आरोप है कि रूस इसी तेल से होने वाली कमाई से हथियार और मिसाइलें बनाकर युद्ध को और लंबा खींच रहा है। रूस भारत सहित कई देशों को बड़े पैमाने पर तेल बेच रहा है।

बिजली ढांचे और रेलवे पर बड़े हमले

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि इस बार रूसी हमलों का प्रमुख लक्ष्य बिजली स्टेशन और पावर ग्रिड से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर था। कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हुई। कीव के पास फास्टिव में एक ड्रोन हमले से रेलवे स्टेशन पूरी तरह नष्ट हो गया, जिससे परिवहन व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई।

अमेरिका-यूक्रेन वार्ता बिना नतीजे के खत्म

इन सैन्य हमलों की पृष्ठभूमि में फ्लोरिडा में यूक्रेनी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच तीन दिनों तक चली बातचीत बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गई। इन वार्ताओं में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के करीबी स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल रहे।

जेलेंस्की ने बताया कि उन्होंने विटकॉफ और कुशनर से फोन पर भी बातचीत की और इसे सकारात्मक बताया। दोनों पक्ष सुरक्षा गारंटी के ढांचे पर एक सामान्य सहमति तक तो पहुंचे, लेकिन किसी स्पष्ट और बाध्यकारी समझौते की घोषणा नहीं हो सकी। जेलेंस्की के अनुसार वास्तविक शांति तभी संभव है जब रूस गंभीरता से कदम उठाए और हमले रोके।

रूस पर हत्याएं रोकने और डी-एस्केलेशन का दबाव

अमेरिकी और यूक्रेनी प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि युद्ध खत्म करने के लिए रूस को नागरिकों की हत्याएं रोकनी होंगी और तनाव कम करने के ठोस कदम उठाने होंगे। अब तक रूस की ओर से किसी बड़ी रियायत का संकेत नहीं मिला है और बड़े पैमाने पर हमले जारी हैं।

जेलेंस्की ने कहा कि वार्ता में युद्ध समाप्त करने के संभावित रास्तों, समझौतों और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई। उन्होंने दोहराया कि यूक्रेन अमेरिका के साथ मिलकर काम जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन निर्णायक प्रगति अभी दूर दिख रही है।

लंदन में यूरोपीय नेताओं की अहम बैठक

इसी बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार को लंदन में मिलने वाले हैं। इस बैठक में यूक्रेन की दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी और अमेरिका की अगुवाई वाली शांति प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी।

मैक्रों ने रूसी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि रूस शांति नहीं चाहता और लगातार उकसावे वाले कदम उठा रहा है। उनके मुताबिक, रूस पर और अधिक दबाव बनाना जरूरी है ताकि उसे शांति वार्ता के लिए मजबूर किया जा सके। ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने भी कहा कि यूक्रेन अपना भविष्य खुद तय करेगा और संभावित अंतरराष्ट्रीय शांति सेना उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

अमेरिका की नीयत पर यूरोपीय शंकाएं

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि अमेरिका यूक्रेन को धोखा दे सकता है। जर्मन अखबार डेर श्पीगल के अनुसार, 1 दिसंबर को यूरोपीय नेताओं की एक गोपनीय वीडियो कॉल लीक हुई, जिसमें जर्मन चांसलर फेडरिक मर्ज, मैक्रों, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब, नाटो के महासचिव मार्क रूटे, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की शामिल थे।

इस कॉल के दौरान मैक्रों ने आशंका व्यक्त की कि अमेरिका बिना मजबूत सुरक्षा गारंटी दिए यूक्रेन को कुछ क्षेत्रों से पीछे हटने के लिए मजबूर कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, कई यूरोपीय नेताओं ने ट्रम्प के करीबी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पर अविश्वास जताया और जेलेंस्की को आगाह किया कि उनके साथ व्यवहार में अत्यधिक सतर्क रहें।

जर्मन चांसलर मर्ज ने कथित तौर पर जेलेंस्की से कहा कि आने वाले दिनों में बहुत सावधानी बरतें, क्योंकि उनके साथ और यूरोप के साथ राजनीतिक खेल खेला जा रहा है। फिनलैंड के राष्ट्रपति और नाटो प्रमुख ने भी यही बात दोहराई कि जेलेंस्की को इन अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस पूरी खबर को झूठा और भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया।

पुतिन की चेतावनी: यूरोप से युद्ध के लिए तैयार

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने हाल में यूरोपीय देशों को कड़ी चेतावनी दी कि अगर यूरोप ने रूस के खिलाफ युद्ध शुरू किया, तो रूस पूरी तरह जवाब देने के लिए तैयार है। पुतिन ने कहा कि रूस यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर टकराव हुआ तो हालात बहुत तेजी से बिगड़ सकते हैं और बातचीत की गुंजाइश खत्म हो सकती है।

उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन में रूस अभी पूर्ण युद्ध नहीं, बल्कि सीमित और सर्जिकल ऑपरेशन जैसी कार्रवाई कर रहा है। पुतिन के अनुसार, अगर यूरोप के साथ सीधा युद्ध हुआ तो रूस अपनी पूरी सैन्य क्षमता के साथ जवाब देगा और स्थिति बिल्कुल अलग होगी।

2022 से जारी युद्ध की मानवीय कीमत

रूस-यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था, जिसकी मूल वजह यूक्रेनी जमीन पर रूस का कब्जा बताया जाता है। माना जाता है कि रूस फिलहाल यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए हुए है। इस संघर्ष में हजारों सैनिक और आम नागरिक मारे जा चुके हैं और लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

जून 2023 तक लगभग 80 लाख यूक्रेनी नागरिक देश छोड़कर अन्य देशों में शरण ले चुके थे। युद्ध के लंबे खिंचने से न केवल यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी गहरा असर पड़ा है।

निष्कर्ष: बढ़ते हमले, घटती भरोसेमंदी

ताजा घटनाक्रम दिखाता है कि एक तरफ मोर्चे पर हमले और जवाबी हमले बढ़ रहे हैं, तो दूसरी ओर कूटनीतिक स्तर पर अविश्वास, ध्रुवीकरण और अनिश्चितता भी गहराती जा रही है। रूस के भीषण हवाई हमलों, यूक्रेन के तेल रिफाइनरियों पर वार, बेनतीजा अमेरिका-यूक्रेन वार्ता और यूरोपीय नेताओं की चिंताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तात्कालिक शांति अभी दूर की संभावना है। जब तक रूस, यूक्रेन और प्रमुख वैश्विक शक्तियां आपसी भरोसा और ठोस सुरक्षा गारंटी का ढांचा नहीं बना पातीं, तब तक इस युद्ध का मानवीय और राजनीतिक संकट जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।

Vivek Singh