शीतलहर-कड़ाके की ठंड से MP के कई जिलों में स्कूल बंद, टाइमिंग बदली

· 1 min read
शीतलहर-कड़ाके की ठंड से MP के कई जिलों में स्कूल बंद, टाइमिंग बदली

मध्यप्रदेश में शीतलहर और घने कोहरे के बीच कई जिलों में स्कूलों की छुट्टी

मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड, शीतलहर और घने कोहरे के चलते कई जिलों में स्कूलों की छुट्टियां घोषित की गई हैं और कुछ जगहों पर स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार यह ठंड का दौर नवंबर-दिसंबर के रिकॉर्ड तोड़ ठंड के बाद जनवरी में भी जारी है।

इंदौर, शाजापुर, मंदसौर और उज्जैन में छुट्टियां, भोपाल में समय बदला

इंदौर में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए तीन दिन का अवकाश घोषित किया गया है। शाजापुर जिले में नर्सरी से 8वीं तक दो दिन स्कूल बंद रहेंगे। मंदसौर और उज्जैन में भी छात्रों को ठंड से राहत देने के लिए छुट्टी दी गई है। वहीं राजधानी भोपाल में स्कूल अब सुबह 9.30 बजे के बाद ही खोले जाएंगे, ताकि कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के समय बच्चों को बाहर न निकलना पड़े।

कोहरा और तापमान: कई जिलों में दृश्यता घटी, पारा लुढ़का

प्रदेशभर में घने कोहरे का असर दिखाई दे रहा है। भोपाल और उज्जैन में सुबह दृश्यता लगभग 50 मीटर तक सिमट गई। छतरपुर जिले के नौगांव में न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और यहां एक ही रात में पारा 8.3 डिग्री तक लुढ़क गया। नर्मदापुरम, बालाघाट, ग्वालियर, रतलाम, दतिया, धार, गुना, रायसेन, राजगढ़, दमोह, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना, श्योपुर, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर और रीवा सहित कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा।

राजगढ़ में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री, दतिया में 5.1 डिग्री, पचमढ़ी में 6.4 डिग्री, शिवपुरी में 7 डिग्री, रतलाम में 7.4 डिग्री, श्योपुर और मंडला में 7.6 डिग्री, खजुराहो में 8 डिग्री, खंडवा में 9 डिग्री, गुना में 9.1 डिग्री, धार में 9.2 डिग्री और उमरिया में 9.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, जहां पारा 6.4 डिग्री तक पहुंच गया। भोपाल में 10.8 डिग्री, इंदौर में 11.8 डिग्री, उज्जैन में 11.4 डिग्री और जबलपुर में 11 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

रिकॉर्ड तोड़ सर्दी और जनवरी के लिए पूर्वानुमान

मौसम विभाग के अनुसार इस बार नवंबर और दिसंबर में मध्यप्रदेश में पड़ी सर्दी ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। नवंबर में 84 साल और दिसंबर में 25 साल का ठंड का रिकॉर्ड टूटा है। विभाग ने आशंका जताई है कि जनवरी में भी उसी तरह कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और शीतलहर का दौर जारी रहेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक जनवरी में प्रदेश के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान पहले भी माइनस तक जा चुका है और इस बार भी तेज सर्दी, कोल्ड डे और शीतलहर की स्थिति बन सकती है।

ठंड बढ़ाने में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और जेट स्ट्रीम की भूमिका

विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की सक्रियता के कारण मध्यप्रदेश में सर्दी तेज हो रही है। उत्तर भारत से आने वाली ठंडी और पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाएं मिलकर तापमान में गिरावट बढ़ा रही हैं। साथ ही ऊंचाई पर चलने वाली तेज जेट स्ट्रीम भी ठंड को और कड़ा कर रही है।

मौसम विभाग के मुताबिक जेट स्ट्रीम जमीन से लगभग 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर बहने वाली तेज हवा की पट्टी होती है। इस बार इसकी रफ्तार 278 से 285 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंची है, जो देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। इन जेट स्ट्रीम के चलते दिन में भी सर्द हवाएं चल रही हैं और ठंड का असर बना हुआ है।

जनवरी: ठंड और बारिश के लिहाज से अहम महीना

मौसम विभाग का विश्लेषण बताता है कि जैसे मानसून के चार महीनों में जुलाई और अगस्त सबसे ज्यादा बारिश वाले होते हैं, उसी प्रकार ठंड के मौसम में दिसंबर और जनवरी सबसे ज्यादा ठंडे रहते हैं। इन दो महीनों में उत्तर भारत से ठंडी हवाएं ज्यादा मात्रा में आती हैं, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जाती है।

पिछले 10 साल के आंकड़ों के अनुसार जनवरी में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के सक्रिय होने से कई बार मावठा (ठंड के दौरान होने वाली बारिश) भी दर्ज की गई है। पिछली सर्दियों में भी कई जिलों में जनवरी में बारिश हुई थी और इस बार भी साल की शुरुआत से ही बादल छाने के संकेत मिले थे।

बड़े शहरों का ऐतिहासिक ठंड और बारिश का रिकॉर्ड

भोपाल

भोपाल में जनवरी के दौरान कड़ाके की ठंड के साथ दिन के समय अपेक्षाकृत गर्मी और बारिश का मिश्रित ट्रेंड देखा जाता है। 18 जनवरी 1935 को शहर में न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो रिकॉर्ड है। वहीं 26 जनवरी 2009 को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। पिछले 10 साल में से 7 साल जनवरी में बारिश दर्ज की जा चुकी है। 6 जनवरी 2004 को 24 घंटे में 2 इंच बारिश हुई थी, जबकि जनवरी 1948 में पूरे महीने में 3.8 इंच बारिश का रिकॉर्ड दर्ज है।

इंदौर

इंदौर में जनवरी की सर्दी का रिकॉर्ड न्यूनतम तापमान माइनस में पहुंच चुका है। 16 जनवरी 1935 को तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो शहर का ओवरऑल रिकॉर्ड है। 27 जनवरी 1990 को दिन का अधिकतम तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस रहा। बारिश के रिकॉर्ड में 6 जनवरी 1920 को 24 घंटे में 3 इंच से ज्यादा पानी गिरा, जबकि उसी वर्ष जनवरी में कुल 4 इंच मासिक बारिश दर्ज की गई।

जबलपुर

जबलपुर में भी जनवरी के महीने में ठंड और बारिश दोनों का प्रभाव देखा जाता है। 7 जनवरी 1946 को न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था, जो रिकॉर्ड रहा। 7 जनवरी 1973 को अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। 24 जनवरी 1919 को 24 घंटे में 2.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी और जनवरी 1919 में ही पूरे महीने में 8 इंच से अधिक वर्षा हुई थी।

ग्वालियर

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में उत्तरी हवाओं के कारण मध्यप्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में ग्वालियर की गिनती होती है। जनवरी में यहां कड़ाके की ठंड दर्ज की जाती है। पिछले 10 साल में 2018 में न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस रहा। 24 जनवरी 1954 को रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री दर्ज किया गया था। वर्ष 2014 से 2024 के बीच 9 वर्षों में जनवरी में बारिश हो चुकी है। 8 जनवरी 1926 को 24 घंटे में 2.1 इंच बारिश का रिकॉर्ड है, जबकि 1948 में जनवरी महीने की कुल बारिश 3.1 इंच दर्ज हुई थी।

उज्जैन

उज्जैन में भी उत्तरी हवाओं का असर साफ दिखाई देता है और यहां जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। पिछले 10 वर्षों में यहां तापमान 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया। 11 जनवरी 1987 को 24 घंटे में सर्वाधिक करीब सवा इंच बारिश हुई थी, जबकि 1994 में जनवरी महीने में कुल 2.2 इंच बारिश दर्ज की गई।

निष्कर्ष: ठंड से राहत के लिए प्रशासनिक कदम और सतर्कता की अपील

तेज सर्दी और घने कोहरे को देखते हुए राज्य के कई जिलों में प्रशासन ने स्कूलों की छुट्टियां और समय में बदलाव जैसे कदम उठाए हैं, ताकि बच्चों को ठंड के दुष्प्रभाव से बचाया जा सके। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि राज्य में शीतलहर, घने कोहरे और कम तापमान की स्थिति फिलहाल बनी रह सकती है। ऐसे में लोगों से सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से सुबह-शाम के समय बाहर निकलने से बचने की अपील की जा रही है।

Arvind Vishwakarma