शिक्षक से नेता बने जीवन कृष्ण साहा
जीवन कृष्ण साहा ने 2004 में प्राइमरी स्कूल में शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया। 2012 में उन्हें हाईस्कूल में नौकरी मिली और 2013 में बीरभूम जिले में ट्रांसफर हो गए, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अनुब्रत मोंडल के साथ करीबी संबंध बनाए। 2021 में टीएमसी ने उन्हें बरवान विधानसभा सीट से टिकट दिया, जहां उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की।
शिक्षक भर्ती घोटाले में फंसे
शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के दौरान सीबीआई ने साहा पर आरोप लगाया कि उन्होंने 2016 में कक्षा 9 और 10 के शिक्षकों की भर्ती के लिए आवेदकों से रिश्वत ली। उनके खिलाफ सीबीआई और ईडी की छापेमारी हुई, जिसमें कई सबूत मिले।
ईडी की कार्रवाई और विवाद
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में साहा और उनके रिश्तेदारों के घरों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान साहा ने अपने फोन तालाब में फेंक दिए और भागने की कोशिश की, लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया। ईडी की जांच में घोटाले से जुड़े पैसों के लेन-देन की जानकारी सामने आई।
निष्कर्ष
जीवन कृष्ण साहा का राजनीतिक सफर विवादों से घिरा रहा है। शिक्षक से नेता बनने तक का उनका सफर अब जांच एजेंसियों की निगरानी में है।