सिलारखेड़ी–सेवरखेड़ी डेम परियोजना किसानों के विरोध से ठप, मुआवजा विवाद गहराया
उज्जैन में शिप्रा नदी को सालभर प्रवाहमान रखने और सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के लिए बनाई जा रही सिलारखेड़ी–सेवरखेड़ी डेम परियोजना पिछले दस दिनों से पूरी तरह बंद पड़ी है। यह परियोजना मुख्यमंत्री मोहन यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जा रही है, लेकिन जमीन के मुआवजे को लेकर किसानों की नाराजगी के कारण काम रुक गया है।
डेम निर्माण 25% पूरा, 400 बीघा जमीन का अधिग्रहण प्रस्तावित
शहर से करीब 17 किलोमीटर दूर कल्याणपुरा गांव में इस डेम का निर्माण मार्च में शुरू हुआ था। अब तक लगभग 25 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना के तहत सिलारखेड़ी से सेवरखेड़ी तक पाइपलाइन बिछाई जानी है, जिसके लिए 13 गांवों के लगभग 300 किसानों की करीब 400 बीघा जमीन का अधिग्रहण होना है। कल्याणपुरा क्षेत्र में डेम का कार्य शुरू हो चुका था, लेकिन मुआवजा विवाद के बाद 21 नवंबर से काम रुकवा दिया गया।
किसानों की मांग: 25 लाख प्रति बीघा मुआवजा
किसानों का आरोप है कि प्रशासन जमीन का मुआवजा केवल 3 से 6 लाख रुपये प्रति बीघा तय कर रहा है, जबकि उनका कहना है कि बाजार मूल्य 50 लाख से 1 करोड़ रुपये प्रति बीघा के बीच है। किसानों की मांग है कि उन्हें कम से कम 25 लाख रुपये प्रति बीघा का मुआवजा दिया जाए। प्रशासन की ओर से फिलहाल 17.50 लाख रुपये प्रति बीघा तक देने की सहमति बताई जा रही है, जिस पर किसान राजी नहीं हैं।
कलेक्टर से सीएम तक कई दौर की बातचीत बेनतीजा
किसान नेता दिलीप सिंह सिसोदिया के अनुसार, अगस्त में किसान उज्जैन कलेक्टर, कमिश्नर, विधायक, एडीएम और एसडीएम से मिलकर अपनी बात रख चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं निकला। 29 नवंबर को किसान मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी मिले, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रशासन को उचित मुआवजा देने के निर्देश दिए। इसके बावजूद मुआवजा राशि पर सहमति नहीं बन सकी और विवाद बरकरार है।
परियोजना की समय सीमा पर संकट
किसानों के विरोध और काम रुकने के चलते डेम निर्माण फिलहाल पूरी तरह ठप है। समाधान न निकलने से परियोजना की समय सीमा पर भी संकट खड़ा हो गया है। इस वजह से शिप्रा नदी को प्रवाहमान रखने की योजना की प्रगति भी प्रभावित हो रही है।
शिप्रा की सफाई के लिए अन्य बड़ी परियोजनाएं भी जारी
उज्जैन में शिप्रा नदी को स्वच्छ और प्रवाहमान बनाए रखने के लिए 1650 करोड़ रुपये की दो बड़ी परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना के तहत कान्ह नदी के गंदे पानी को शिप्रा में मिलने से पहले ही रोका जाएगा। इस गंदे पानी को टनल और क्लोज डक्ट के माध्यम से डायवर्ट कर लगभग 30 किलोमीटर दूर गंभीर नदी के डाउनस्ट्रीम में छोड़ा जाएगा। इन परियोजनाओं के साथ सिलारखेड़ी–सेवरखेड़ी डेम को भी महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जो फिलहाल मुआवजा विवाद के कारण अटका हुआ है।
Bhavanesh Soni