मध्यप्रदेश में सरकारी विमान और हेलिकॉप्टर किराये पर बढ़ता खर्च
मध्यप्रदेश में सरकारी उपयोग के लिए लिए जाने वाले विमान और हेलिकॉप्टर के किराये पर होने वाला खर्च पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों प्रताप ग्रेवाल और पंकज उपाध्याय द्वारा पूछे गए प्रश्नों के जवाब में सरकार ने विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए, जिनसे विमानन खर्च में आई तेज वृद्धि सामने आई।
2019 से 2025 तक किराये के खर्च में भारी उछाल
मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में विमान किराये पर मात्र 1.63 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष खर्च किए गए थे। हालांकि 2025 तक यही खर्च बढ़कर 90.7 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष के स्तर तक पहुंच गया।
दस्तावेजों में बताया गया कि जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच विमान किराये पर कुल 290 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें से सिर्फ जनवरी से नवंबर 2025 के बीच ही निजी कंपनियों को 90.7 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
मोहन यादव के कार्यकाल में 143 करोड़ रुपये का व्यय
विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल के दौरान जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच विमान किराये पर 143 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इन आंकड़ों ने राज्य के विमानन खर्च की पूरी तस्वीर स्पष्ट कर दी, जिसमें अल्प अवधि में भारी वृद्धि दिखी।
कोविड के आधार पर 2023 में किराया बढ़ाने का निर्णय
विधानसभा में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2023 में विमान और हेलिकॉप्टर का किराया बढ़ाने के लिए कोविड से जुड़ी परिस्थितियों सहित कई तर्क दिए गए। इन्हीं आधारों पर विभिन्न श्रेणी के विमानों और हेलिकॉप्टरों का किराया 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक बढ़ाया गया।
उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2022–23 में 4.45 लाख रुपये प्रति घंटा वाला किराया बढ़कर 2024 में 5.70 लाख रुपये प्रति घंटा हो गया। इसी तरह 3.50 लाख रुपये प्रति घंटा वाला किराया बढ़कर 4.75 लाख रुपये प्रति घंटा पहुंच गया। हेलिकॉप्टरों का किराया भी कुछ श्रेणियों में बढ़कर 5.29 लाख रुपये प्रति घंटा तक पहुंचा।
सरकारी विमान दुर्घटनाग्रस्त, बेड़े में सिर्फ एक हेलिकॉप्टर चालू
विधायक पंकज उपाध्याय के एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी गई कि वर्तमान में सरकार के पास केवल एक हेलिकॉप्टर उड़ान योग्य है। सरकारी विमान मई 2021 में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था और वह ग्वालियर एयरबेस पर खड़ा है तथा उड़ान के लिए उपयोग नहीं किया जा रहा है।
निजी किराये के एयरक्राफ्ट पर निर्भरता में इजाफा
विधानसभा में रखे गए दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट हुआ कि सरकारी विमानों की स्थिति समय के साथ खराब होती गई और उनका बेड़ा छोटा होता चला गया। इसके विपरीत, सरकार की जरूरतों को पूरा करने के लिए किराये के विमान और हेलिकॉप्टरों पर निर्भरता बढ़ती गई।
दस्तावेजों के अनुसार, जैसे-जैसे सरकारी बेड़े में कमी आई, वैसे-वैसे किराया बढ़ता गया और निजी कंपनियों को किए जाने वाले भुगतान में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई। इस तरह बीते कुछ वर्षों में सरकारी विमानन व्यय का बड़ा हिस्सा किराये के एयरक्राफ्ट पर खर्च होने लगा।
विधानसभा में दी गई जानकारी में यह भी उल्लेख है कि पिछले पांच वर्षों में विभिन्न निजी कंपनियों को विमान और हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराने के बदले अलग-अलग राशि का भुगतान किया गया, जिससे कुल खर्च में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई।
Satyam Tripathi