शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर नाबालिगों के यौन शोषण का केस दर्ज करने का आदेश: प्रयागराज कोर्ट
प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण की प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात लोगों पर भी केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने 13 फरवरी को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था और 21 फरवरी को यह फैसला सुनाया।
आरोप और कोर्ट का निर्णय
यह आरोप जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कोर्ट में 2 बच्चों को पेश करके लगाए थे। बच्चों के बयान कोर्ट में कैमरे के सामने दर्ज किए गए थे। स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया की कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के बाद यह आदेश जारी किए। अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आरोप गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं और पॉक्सो अधिनियम लागू होता है। कोर्ट ने माना कि साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस जांच आवश्यक है और केवल निजी शिकायत के रूप में मामले को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। जज ने संबंधित थाना प्रभारी को तत्काल FIR दर्ज करने, कानून के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने, पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने और पीड़ितों की पहचान व गरिमा की रक्षा करने का आदेश दिया। जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करने को भी कहा गया।
शंकराचार्य का जवाब
कोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि यह रामभद्राचार्य के एक चेले (आशुतोष ब्रह्मचारी) द्वारा करवाया गया झूठा मुकदमा है, जो हिस्ट्रीशीटर है और पहले भी लोगों पर झूठे केस करता रहा है। शंकराचार्य ने इसे रामभद्राचार्य के साथ चल रहे 'वाकयुद्ध' का परिणाम बताया और आरोप लगाया कि यह उन्हें 'गोमाता की रक्षा' के लिए सरकार के खिलाफ आवाज उठाने से रोकने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि वे न्यायालय की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे और जल्द से जल्द जांच की मांग की, ताकि 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो जाए। उन्होंने अपने मठ को 'खुला मठ' बताया, जहां 100-200 लोग रहते हैं और हर कोई आता-जाता रहता है, शीश महल के आरोपों का खंडन करते हुए।
शिकायतकर्ता की प्रतिक्रिया और आरोप
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने न्यायालय के फैसले पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि न्याय अभी जिंदा है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि शिष्यों के साथ यौन शोषण और समलैंगिक अपराध किए गए हैं। उन्होंने अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम को भी वाराणसी में शंकराचार्य के 'विद्यामठ' जाने और 'पंचम तल' व 'शीश महल' को देखने का चैलेंज दिया, जहां कथित तौर पर 'सखियां' रहती हैं। आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद दायर किया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि गुरुकुल की आड़ में बाल उत्पीड़न किया जाता है। उन्होंने पहले 24 जनवरी को पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर कोर्ट का रुख किया।
शिकायत की पृष्ठभूमि
आशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया कि उनके शिविर में आए दो नाबालिग शिष्यों ने अपने साथ हुए यौन शोषण की कहानी सुनाई थी, जिसमें अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों द्वारा एक साल से अधिक समय तक कुकर्म करने की बात शामिल थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बच्चों पर दबाव बनाया जाता था कि यह 'गुरु सेवा' है। आशुतोष ब्रह्मचारी का जन्म शामली के कांधला कस्बे के एक पंडित परिवार में हुआ था और उन्होंने 2022 में जगतगुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ली थी। यह विवाद माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने के बाद पुलिस से हुई झड़प और रामभद्राचार्य व अविमुक्तेश्वरानंद के बीच बढ़ते मतभेदों के संदर्भ में सामने आया है।
Amit Pateria