शशि थरूर बोले- विदेश नीति भारत की, पाकिस्तान की नई सैन्य रणनीति पर चिंता

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शशि थरूर बोले- विदेश नीति भारत की, पाकिस्तान की नई सैन्य रणनीति पर चिंता

शशि थरूर का बयान: विदेश नीति भारत की, पार्टी की नहीं

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि भारत की विदेश नीति किसी राजनीतिक पार्टी की नहीं, पूरे देश की होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान से आने वाले सुरक्षा खतरों को भारत को हरगिज़ हल्के में नहीं लेना चाहिए।

प्रधानमंत्री की हार को भारत की हार बताने वाला बयान

थरूर ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि अगर भारतीय राजनीति में कोई प्रधानमंत्री की हार पर खुशी मनाता है, तो वह वास्तव में भारत की हार पर खुश होता है। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के शब्दों का हवाला देते हुए कहा, “अगर भारत मर गया, तो कौन जिएगा?”

पाकिस्तान की बदलती सैन्य रणनीति पर चिंता

थरूर ने कहा कि पाकिस्तान अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव कर रहा है। उनके अनुसार, पाकिस्तान अब हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक और छिपकर हमला करने की नीति पर जोर दे रहा है।

उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान पहले ड्रोन, रॉकेट और मिसाइल हमलों का सहारा ले चुका है और अब और ज्यादा खतरनाक तकनीकों की ओर बढ़ रहा है। थरूर के अनुसार, पाकिस्तान की नई सैन्य नीति ऐसी नहीं है जिसे भारत नजरअंदाज कर सके।

पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और सेना की भूमिका

पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर बोलते हुए थरूर ने उसे बेहद समस्याग्रस्त देश बताया। उन्होंने कहा कि वहां नाम मात्र की नागरिक सरकार है और असली ताकत सेना के हाथों में है।

थरूर के मुताबिक नीति निर्धारण में सेना का दबदबा रहता है और फैसले भी उसी के हिसाब से लिए जाते हैं।

पहले के बयान: अवैध प्रवासियों और वंशवादी राजनीति पर टिप्पणी

25 दिसंबर को थरूर ने देश में गैरकानूनी तरीके से रहने वाले लोगों, यानी अवैध प्रवासियों, के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि सीमाओं की सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था को ठीक से संभालना सरकार की जिम्मेदारी है।

4 नवंबर को लिखे एक लेख में थरूर ने भारत की वंशवादी राजनीति की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि भारत में राजनीति परिवार-केंद्रित होकर फैमिली बिजनेस बन गई है और जब तक राजनीति परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी, लोकतांत्रिक सरकार का असली मतलब पूरा नहीं हो सकेगा।

देश के प्रति पहली वफादारी की बात

इसी से जुड़ी एक दूसरी चर्चा में, 20 जुलाई को कोच्चि में ‘शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय विकास’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में थरूर ने कहा था कि किसी भी नेता की पहली वफादारी देश के प्रति होनी चाहिए, न कि पार्टी के प्रति।

थरूर के विभिन्न बयानों की यह श्रृंखला विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक राजनीति पर उनके दृष्टिकोण को सामने लाती है, जिसमें वे देश को पार्टी से ऊपर रखने की बात दोहराते रहे हैं।

Pushpendra Chaubey