संघ में रिटायरमेंट की परंपरा नहीं: भागवत

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संघ में रिटायरमेंट की परंपरा नहीं: भागवत

संघ में रिटायरमेंट की परंपरा नहीं: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ साल पूरे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने रिटायरमेंट को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संघ में रिटायरमेंट का कोई प्रावधान नहीं है और हर स्वयंसेवक अपने आखिरी समय तक संघ के लिए कार्य कर सकता है।

75 साल की उम्र पर रिटायरमेंट का सवाल

एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने उनसे राजनेताओं के 75 वर्ष की आयु के बाद रिटायरमेंट को लेकर सवाल किया। भागवत ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने कभी रिटायरमेंट का समर्थन नहीं किया। उन्होंने मोरोपंत पिंगले का उदाहरण देते हुए बताया कि उम्र के बावजूद संघ में सक्रियता बनी रहती है।

संघ के प्रति प्रतिबद्धता

भागवत ने कहा कि संघ में कोई रिटायरमेंट बेनिफिट नहीं है और स्वयंसेवक अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संघ उनसे 80 वर्ष की उम्र में भी शाखा चलाने को कहेगा, तो वे इसे खुशी-खुशी करेंगे।

संघ की कार्य प्रणाली पर जोर

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघ में कार्य करने की प्रक्रिया स्वैच्छिक होती है और इसे किसी भी उम्र में किया जा सकता है। भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ में नेतृत्व के लिए कई योग्य व्यक्ति हैं और यह किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है।

संघ प्रमुख के विचार इस बात को दर्शाते हैं कि संघ में सेवा भावना और समर्पण का महत्व सबसे ऊपर है। रिटायरमेंट की अवधारणा को नकारते हुए उन्होंने संघ के कार्यों को निरंतरता देने पर बल दिया।