संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार का निर्देश
मध्य प्रदेश सरकार हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को संस्कृत विषय का अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। संस्कृत विषय के प्रति विद्यार्थियों में घटते रुझान को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश
प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से जानकारी मांगी गई है कि जिन विद्यालयों में संस्कृत के शिक्षक पदस्थ हैं, वहां कितने विद्यार्थियों ने संस्कृत विषय लिया है। अगर नहीं लिया है तो उन्हें प्रोत्साहित कर संस्कृत विषय लेने के लिए कहा जाए।
महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान द्वारा प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी निर्देश में कहा गया है कि वे अपने जिले के सभी शासकीय स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल में संस्कृत विषय चयन और अध्यापन कार्य करने को प्रोत्साहित करें।
9वीं और 11वीं में विषय चयन
संस्थान के निदेशक द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि जिन हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में संस्कृत शिक्षक वर्ग एक कार्यरत हैं, उन स्कूलों में कक्षा 9वीं और कक्षा 11वीं में संस्कृत विषय का अध्यापन नहीं कराया जा रहा है। इसलिए चालू शिक्षा सत्र से कक्षा नौवीं और कक्षा ग्यारहवीं में छात्रों को प्रोत्साहित कर संस्कृत विषय का चयन करने के लिए कहा जाए और ऐसे बच्चों के प्रवेश की जानकारी राज्य सरकार को भेजी जाए।
संस्कृत संस्थान की ओर से वर्ष 2025-26 में दोनों ही कक्षाओं में एडमिशन लेने वाले संस्कृत विषय के विद्यार्थियों की जानकारी भी मांगी गई है।
उच्च शिक्षा में छात्रवृत्ति
उच्च शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए मध्य प्रदेश के ऐसे सभी वर्गों के पात्र निशक्तजन विद्यार्थी, जो शासकीय महाविद्यालय में पढ़ाई करते हुए कंप्यूटर और प्रबंधन में डिग्री ले रहे हैं, उन्हें एकीकृत संस्कृत छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया है।
निशक्तजन विद्यार्थियों को कंप्यूटर एवं प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त करने के लिए जीवन निर्वाह भत्ता और परिवहन भत्ता योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति दिए जाने का भी निर्णय लिया गया है। इसके लिए विद्यार्थियों से नए आवेदन और नवीनीकरण आवेदन संस्था प्रमुख से अप्रूव कराकर संबंधित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा कार्यालय में जमा किए जा सकेंगे। दोनों छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए 31 अगस्त तक आवेदन बुलाए गए हैं।
Sachin Saxena