सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सरकार कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स का मुआवजा दे, नो-फॉल्ट पॉलिसी बनाए
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से होने वाले नुकसान के लिए मुआवजा दे। इसके लिए सरकार को एक 'नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी' बनाने का आदेश दिया गया है।
नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी का मतलब
नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी का अर्थ है कि यदि किसी व्यक्ति को किसी दवा या वैक्सीन से नुकसान होता है, तो उसे मुआवजा मिल सकता है, भले ही इसमें किसी की गलती साबित न हुई हो। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यह भी कहा कि वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स की निगरानी के लिए मौजूदा प्रणाली जारी रहेगी और इसके लिए किसी अलग विशेषज्ञ पैनल के गठन की आवश्यकता नहीं है।
याचिकाओं का आधार और सरकारी रुख
यह फैसला रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन द्वारा 2021 में दायर याचिकाओं पर आया है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटियों की मृत्यु कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के कारण हुई थी। इन याचिकाओं पर पिछले साल 13 नवंबर को लंबी बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। इससे पहले, सरकार ने केरल हाईकोर्ट के एक अंतरिम आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें मुआवजे की नीति बनाने का आदेश दिया गया था। 2022 में, सरकार ने अपने जवाबी हलफनामे में तर्क दिया था कि वह मुआवजे के लिए उत्तरदायी नहीं है, क्योंकि वैक्सीन अपनी मर्जी से लगवाई जाती है और यह लोगों का जोखिम जानने के बावजूद लिया गया फैसला होता है।
वैक्सीन से कथित मौतों के मामले
मई 2024 में वैक्सीन से मौत के दो प्रमुख दावे सामने आए थे। वेणुगोपाल गोविंदन ने बताया था कि उनकी बेटी करुण्या की जुलाई 2021 में कोवीशील्ड वैक्सीन लेने के लगभग एक महीने बाद मौत हो गई थी। सीरम इंस्टीट्यूट ने ब्रिटेन की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले पर कोवीशील्ड बनाई है, और एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटिश हाईकोर्ट में स्वीकार किया है कि उनकी कोविड-19 वैक्सीन से खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। करुण्या के मामले में, परिवार की शिकायत पर राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया था, हालांकि समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि मौत का कारण वैक्सीन है, इसके पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे।
दूसरा मामला 8 साल की श्री ओमत्री (रितिका) का था, जिनकी मई 2021 में मौत हो गई थी। परिवार के अनुसार, रितिका ने कोवीशील्ड की पहली खुराक ली थी, जिसके 7 दिनों के भीतर उन्हें तेज बुखार और उल्टी की शिकायत हुई। एमआरआई में उनके ब्रेन में ब्लड क्लोटिंग और ब्रेन हेमरेज सामने आया, जिसके दो हफ्ते बाद उनकी मृत्यु हो गई। बाद में आरटीआई के माध्यम से परिवार को पता चला कि उनकी बेटी को थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (TTS) हुआ था, और उनकी मृत्यु ‘वैक्सीन उत्पाद संबंधी प्रतिक्रिया’ के कारण हुई थी।
आईसीएमआर की स्टडी और वैक्सीन की जानकारी
जुलाई 2025 में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने अपनी स्टडी में बताया था कि देश में हार्ट अटैक से होने वाली अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है। यह स्टडी 18 से 45 साल के लोगों की अचानक मौत पर आधारित है। भारत में दो मुख्य कोविड वैक्सीन विकसित की गई थीं: भारत बायोटेक ने ICMR के सहयोग से कोवैक्सिन का निर्माण किया था, जबकि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से कोवीशील्ड बनाई थी।
Lokendra Mishra