ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर रखी नई शर्त, कहा- एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे

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ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर रखी नई शर्त, कहा- एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर रखी नई शर्त, दुनिया को तेल आपूर्ति रोकने की चेतावनी

ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उसने कहा है कि अगर कुछ शर्तें पूरी नहीं की जातीं, तो वह होर्मुज स्ट्रेट से एक बूंद तेल भी बाहर नहीं जाने देगा। यह घोषणा अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के 11वें दिन की गई है।

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नई शर्तें

ईरान की सेना इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इजराइली मीडिया वाइनेट की रिपोर्टों के अनुसार कहा है कि कुछ देशों के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति तभी मिलेगी, जब वे देश पहले इजराइल और अमेरिका के राजदूतों को अपने यहां से निकाल दें।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से हर साल वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। इस घोषणा से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल की आशंका बढ़ गई है।

हालांकि, अमेरिकी चैनल CNN ने एक अलग रिपोर्ट में कहा है कि ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों पर "सिक्योरिटी टैक्स" यानी सुरक्षा शुल्क लगाने की योजना बना रहा है, विशेषकर उन जहाजों पर जो अमेरिका के सहयोगी देशों के हैं। एक ईरानी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि दुनिया में तेल की कीमतों पर नियंत्रण अब ईरान के हाथ में है और ईरान तब तक लड़ाई जारी रखेगा जब तक ट्रम्प हार मानने की घोषणा नहीं कर देते।

अमेरिका की कड़ी चेतावनी और युद्ध के प्रभाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही रोकने की कोशिश की, तो अमेरिका उस पर अब तक के मुकाबले 20 गुना ज्यादा ताकत से हमला करेगा। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ऐसे ठिकानों को निशाना बनाएगा जिन्हें आसानी से नष्ट किया जा सकता है, जिससे ईरान के लिए देश को दोबारा खड़ा करना लगभग असंभव हो जाएगा। उन्होंने कहा कि "मौत और तबाही" देखने को मिलेगी, हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसी नौबत न आए। ट्रम्प ने यह भी दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना अब तक ईरान के 46 वॉरशिप को डुबो चुकी है और ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' के पहले दो दिनों में ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म कर दी गई है।

इस संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर दिख रहा है। पाकिस्तान और थाईलैंड जैसे देशों ने बढ़ती तेल कीमतों को देखते हुए सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने का आदेश दिया है और खर्चों में कटौती की योजनाएं लागू की हैं। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा है कि ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से रूस को अधिक आय मिल रही है, जिससे उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को वित्तीय मदद मिल रही है।

इराक ने अपने एयरस्पेस को 72 घंटे के लिए बंद रखने की अवधि बढ़ा दी है। वहीं, अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान में रह रहे हजारों अफगान नागरिक देश छोड़कर वापस अफगानिस्तान लौट रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनीसेफ के मुताबिक, लेबनान में अब तक कम से कम 83 बच्चों की मौत हो चुकी है और 254 बच्चे घायल हुए हैं, जो संघर्ष का मानवीय पहलू दर्शाता है।

क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं और ईरान का रुख

तुर्किये ने देश में पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात करने का फैसला किया है और ईरान के राजदूत मोहम्मद हसन हबीबोल्लाहजाद को तलब किया है, क्योंकि ईरान से दागी गई एक मिसाइल तुर्किये के एयर स्पेस में आ गई थी। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रक्षा मंत्रालय ने भी कहा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ईरान से आने वाले मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने की कार्रवाई कर रही है।

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा है कि उनका देश अभी युद्धविराम नहीं चाहता और ईरान पर हमला करने वालों को कड़ा जवाब दिया जाएगा। ईरान के उप विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने भी कहा है कि मौजूदा जंग में ईरान का पलड़ा भारी है और युद्ध कब खत्म होगा, यह ईरान ही तय करेगा।

कुल मिलाकर, ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहा संघर्ष होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के कठोर रुख और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं के साथ एक जटिल मोड़ पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।

Bhavanesh Soni