सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े आरोपों से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पवन खेड़ा को असम पुलिस की जांच में सहयोग करना होगा और वे अदालत की अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ सकते। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आरोप-प्रत्यारोप राजनीति से प्रभावित लगते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर कई विदेशी पासपोर्ट और विदेश में कंपनी होने का आरोप लगाया था। इसके बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने पवन खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी में FIR दर्ज कराई थी। 7 अप्रैल को असम पुलिस ने खेड़ा के दिल्ली स्थित घर पर रेड भी की थी।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि खेड़ा के घर 60 पुलिसकर्मियों को भेजा गया था, जिसका उद्देश्य डराना और उत्पीड़न करना था। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी कई बातें हैं जो सार्वजनिक रूप से नहीं कही जा सकतीं, लेकिन असम के मुख्यमंत्री को इस पर विचार करना चाहिए।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के जवाब में कहा कि उन्हें किसी से भी लोकतंत्र पर सबक सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा एक महिला की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर उछाला गया, जिसका राजनीति से संबंध नहीं है। उन्हें विश्वास है कि अदालतें सच्चाई सामने लाएंगी।
अदालती प्रक्रिया
यह मामला पहले तेलंगाना हाईकोर्ट पहुंचा था, जिसने खेड़ा को ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। असम सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। बाद में, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद वे फिर सुप्रीम कोर्ट गए।
Lokendra Mishra