तमिलनाडु में विजय की रैली में भगदड़, मृतकों की संख्या 31 पहुंची
तमिलनाडु के करूर में एक्टर और टीवीके (तमिलगा वेट्ट्री कज़गम) प्रमुख विजय की रैली के दौरान मची भगदड़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है। मृतकों में छह बच्चे, नौ पुरुष और 16 महिलाएं शामिल हैं। तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री मा सुब्रमण्यम ने इस जानकारी को साझा किया और बताया कि 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
घटना का विवरण
यह रैली तमिलनाडु के नामक्कल जिले में आयोजित की गई थी, जहां भारी संख्या में लोग विजय को सुनने के लिए पहुंचे थे। भीड़ इतनी बढ़ गई कि स्थिति बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई। रैली के दौरान कई लोग बेहोश हो गए, जिनमें बच्चे और पार्टी कार्यकर्ता भी शामिल थे। विजय ने स्थिति को भांपते हुए अपना भाषण समय से पहले ही समाप्त कर दिया और भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
आपातकालीन सेवाओं की चुनौती
घटनास्थल पर एम्बुलेंस को पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि सड़कें भीड़ से भरी हुई थीं। बेहोश हुए लोगों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। करूर के अस्पताल में स्थिति अत्यधिक गंभीर बताई जा रही है।
मुख्यमंत्री स्टालिन और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और जिलाधिकारी को हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कदम उठाने को कहा है। उन्होंने जनता से चिकित्सकों और पुलिस के साथ सहयोग की अपील भी की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास
मौके पर पहुंचे पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की। मुख्यमंत्री स्टालिन ने घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के आदेश दिए हैं। विजय ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं।
यह घटना तमिलनाडु में राजनीतिक रैलियों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।