उद्धव ठाकरे का महायुति पर आरोप, राज ठाकरे 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचे
निर्विरोध जीत पर सवाल, भीड़तंत्र का आरोप
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि महायुति पहले वोट चुराती थी और अब उम्मीदवार चुरा रही है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा माहौल बन गया है जैसे लोकतंत्र पर भीड़तंत्र का कब्जा हो गया हो। उनका बयान उन 68 उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत के संदर्भ में आया, जो महायुति के पक्ष में घोषित किए गए हैं।
राज ठाकरे की दो दशक बाद शिवसेना भवन वापसी
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे लगभग 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचे। यहां उन्होंने और उद्धव ठाकरे ने मिलकर पार्टी का मेनिफेस्टो जारी किया। इस मुलाकात को राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
उद्धव की मांग: निर्विरोध जीत वाले वार्डों में फिर से चुनाव
उद्धव ठाकरे ने रविवार को मांग की कि जिन नगर निगम चुनावों में उम्मीदवार निर्विरोध जीते हैं, उन्हें रद्द किया जाए और उन वार्डों में फिर से चुनाव कराए जाएं। उन्होंने कहा कि निर्विरोध जीत की स्थिति लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है।
ठाणे में निर्विरोध जीत पर धांधली के आरोप
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में बीजेपी और शिवसेना के 32 उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए हैं। इसके बाद शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने चुनावों में धांधली के आरोप लगाए।
शिवसेना (UBT) के ठाणे प्रमुख केदार दिघे ने बताया कि पूरे राज्य में नगर निगम चुनावों में निर्विरोध निर्वाचित घोषित 68 उम्मीदवारों में से 32 अकेले ठाणे जिले के हैं, जो लगभग 47 प्रतिशत है। उन्होंने इन नतीजों की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे चुनाव इतिहास की एक बड़ी साजिश बताया। साथ ही उन्होंने यह तर्क भी दिया कि भले ही केवल एक उम्मीदवार चुनाव में हो, मतदाताओं को ‘नन ऑफ द अबव’ (NOTA) का विकल्प जरूर मिलना चाहिए।
फडणवीस का जवाब: कोर्ट जाए विपक्ष, फैसला जनता का ही माना जाएगा
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर विपक्षी पार्टियां नगर निगम चुनावों में महायुति उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत को अदालत में चुनौती देने का निर्णय लेती हैं, तब भी अंततः जनता के फैसले को ही माना जाएगा।
बीजेपी और उसके महायुति सहयोगी 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों में राज्य भर की 68 सीटों पर पहले ही निर्विरोध जीत दर्ज कर चुके हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि सत्ताधारी गठबंधन ने उम्मीदवारों को धमकी और पैसों के जरिए चुनाव से हटने पर मजबूर किया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने घोषणा की है कि वह इन निर्विरोध चुनावों को कोर्ट में चुनौती देगी।
घुसपैठियों और मुंबई की राजनीति पर फडणवीस के बयान
देवेंद्र फडणवीस ने वर्ली में एक रैली के दौरान कहा कि सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर निकालेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे सुनिश्चित करेंगे कि देश की मुंबई को ऐसा मेयर मिले जो मराठी और हिंदू हो।
फडणवीस ने भाषा विवाद की आलोचना करते हुए कहा कि कोई भी मुंबई को राज्य के बाकी हिस्सों से अलग नहीं कर सकता और मुंबईकर विकास चाहते हैं। उनके अनुसार यह चुनाव मुंबई और उसके लोगों के बारे में है, जो अब जाग चुके हैं और प्रगति चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग पहले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को नियंत्रित करते थे, उनकी निष्क्रियता के कारण हजारों मिल मजदूरों को शहर छोड़ना पड़ा।
बीएमसी चुनाव और मतदाताओं की प्राथमिकताएं
एक सर्वे के अनुसार, आने वाले BMC चुनाव में मतदाता पार्षद के चेहरे, पार्टी, जाति या धर्म से ज्यादा उनके काम को महत्व देंगे। लगभग 40 से 54 प्रतिशत लोगों ने अपनी राय में बताया कि पार्षद का काम ही वोट देने का सबसे बड़ा कारक होगा।
इसी सर्वे में संकेत मिला कि विधानसभा चुनावों की तरह BMC चुनावों में भी महिलाओं का लगभग 50 प्रतिशत समर्थन बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन को मिलने की संभावना है।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों नगर निगम और BMC चुनावों को लेकर बेहद गरमाई हुई है। एक ओर महायुति की 68 सीटों पर निर्विरोध जीत ने सत्ता पक्ष को बढ़त दिलाई है, वहीं दूसरी ओर उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और अन्य विपक्षी नेता इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताते हुए कोर्ट और दोबारा चुनाव की मांग कर रहे हैं। इसी बीच फडणवीस विकास, घुसपैठियों और मुंबई की पहचान के मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर चुनावी माहौल को दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।
L. N. Bhargava