उज्जैन में युवा धर्म संसद का तीन दिवसीय आयोजन 17 से 19 सितंबर तक
उज्जैन के देवास रोड स्थित गीता भवन में 17 से 19 सितंबर तक युवा धर्म संसद का आयोजन किया जाएगा। सेवाज्ञ संस्थानम् के सह मीडिया प्रमुख बादल सिंह के अनुसार इस बार 24 से 25 राज्यों से लगभग 1700 छात्र-छात्राओं के रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इसके अलावा लगभग 300 शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी विभिन्न सत्रों में भाग लेंगे। रजिस्ट्रेशन जुलाई में शुरू किए गए थे और 31 अगस्त को बंद कर दिए गए। आयोजकों के मुताबिक आयोजन स्थल की क्षमता के कारण इससे अधिक प्रतिभागियों को शामिल करना संभव नहीं है।
युवा धर्म संसद की शुरुआत 2018 में हुई थी। इससे पहले इसके आयोजन काशी, अयोध्या, हरिद्वार, मथुरा और कांचीपुरम में हो चुके हैं। आयोजकों के अनुसार पिछली पांच धर्म संसदों में लगभग 7100 प्रतिभागी शामिल हो चुके हैं। इस बार का आयोजन सिद्धपीठ हनुमत निवास, अयोध्या के पीठाधीश्वर एवं संरक्षक आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरणजी महाराज के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार युवा धर्म संसद का मूल विचार स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन की स्मृति से जुड़ा है और इसका उद्देश्य युवाओं के बीच धर्म की अवधारणा, भारतीय संस्कार और सनातन संस्कृति से जुड़े विषयों पर संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराना है।
प्रमुख अतिथि और दिनवार कार्यक्रम विवरण
17 सितंबर को भारत-भाव आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा। पुस्तक मेले में लगभग 50 प्रकाशन समूहों के शामिल होने की बात आयोजकों ने कही है। अलग-अलग प्रांतों से आए प्रतिनिधियों के बीच संवाद भी होगा। 18 सितंबर को सुबह 10 से 12 बजे तक औपचारिक उद्घाटन सत्र रखा गया है जिसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्रीनिवास बरखेड़ी और सेवाज्ञ संस्थानम् के अध्यक्ष आशीष कुमार आशु शामिल होंगे। इसके बाद 'धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा एवं चारित्रिक उत्तरदायित्व' विषय पर व्याख्यान सत्र होगा जिसमें अवधेशानंद गिरि महाराज, लेखक एवं गीतकार मनोज मुंतशिर, प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, स्मृति अनंतलक्ष्मी और जे. नंद कुमार के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इसी दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सूचना-विचार संघर्ष जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। देशभर से चुने गए 25 युवाओं के विशेष उद्बोधन का सत्र भी रखा गया है। 19 सितंबर को कृषि-ऋषि संस्कृति और भारत के आजीविका-विचार, मनुष्य निर्माण में आस्था और धर्मस्थलों की भूमिका जैसे विषयों पर सत्र होंगे। इसके बाद समापन समारोह और सांस्कृतिक संध्या आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समापन समारोह में शामिल होने की जानकारी आयोजकों ने दी है।
आयोजन समिति ने तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए लगभग 1.53 करोड़ रुपए का अनुमानित बजट बताया है। इसमें आयोजन स्थल पर 27 लाख रुपए, यात्रा एवं आवास पर 24 लाख, भोजन एवं जलपान पर 18 लाख और प्रतिभागी किट पर 20.20 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। इसके अलावा अतिथियों के यात्रा व्यय पर 12 लाख, प्रदर्शनी एवं पुस्तक स्टॉल पर 9.80 लाख, जनसंपर्क एवं विज्ञापन पर 8 लाख, सेवाज्ञ संस्थानम् की पुस्तक पर 8 लाख, साज-सज्जा एवं मंच पर 5.75 लाख और वीडियो-फोटोग्राफी पर 5 लाख रुपए खर्च का अनुमान बताया गया है। आयोजकों के मुताबिक युवा धर्म संसद का अगला संस्करण द्वारका में आयोजित किया जाएगा जिसके लिए रजिस्ट्रेशन जुलाई 2027 से शुरू किए जाने की योजना है।
Ravi Yadav