उत्तराखंड में ग्रीन टैक्स का नया प्रावधान
उत्तराखंड में यात्रा करना अब महंगा होने वाला है। सरकार ने बाहरी वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाने की योजना बनाई है। पहले यह शुल्क केवल व्यावसायिक वाहनों पर लागू था, लेकिन अब निजी कार, जीप और अन्य चार पहिया गाड़ियों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा।
ग्रीन टैक्स: पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा
ग्रीन टैक्स का उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करना और लोगों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की ओर प्रोत्साहित करना है। इस टैक्स से प्राप्त राजस्व का उपयोग पर्यावरण-संबंधी पहलों जैसे उत्सर्जन निगरानी केंद्र स्थापित करने, सड़क सुरक्षा और शहरी परिवहन सुधार में किया जाएगा।
कैसे काम करेगा यह टैक्स?
परिवहन विभाग ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए एक निजी कंपनी से करार किया है। राज्य की सीमाओं पर 16 ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं, जो बाहरी वाहनों की पहचान करेंगे। यह शुल्क 24 घंटे के लिए मान्य होगा। यदि कोई वाहन एक दिन के भीतर दोबारा प्रवेश करता है, तो उसे शुल्क नहीं देना होगा।
ग्रीन टैक्स फास्टैग के माध्यम से वसूला जाएगा। यदि किसी वाहन के फास्टैग में पैसे नहीं हैं, तो कैमरे द्वारा नंबर को कैप्चर कर संबंधित टीम को संदेश भेजा जाएगा, जो टैक्स वसूल करेगी।
कौन-कौन से वाहन होंगे मुक्त?
दो पहिया वाहन, इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहन, सरकारी वाहन, एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहन को इस टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार का यह कदम पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। ग्रीन टैक्स से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल राज्य की स्वच्छ और सुरक्षित यातायात नीति को मजबूत करने में किया जाएगा।
Vivek Singh