विदिशा में फसल के गिरते दाम पर किसानों का चक्काजाम
मध्यप्रदेश के विदिशा जिले की नई कृषि उपज मंडी के बाहर किसानों ने अचानक चक्काजाम कर दिया। किसानों का आरोप था कि उनकी फसलों के दामों में भारी गिरावट हुई है और व्यापारी मनमाने तरीके से भाव तय कर रहे हैं। इस विरोध के कारण मंडी के बाहर मुख्य मार्ग पर कुछ समय तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा।
फसल के दाम गिरने से भड़के किसान
शमशाबाद क्षेत्र के भैयाखेड़ी गांव से पहुंचे किसान अर्जुन मीणा ने बताया कि तीन दिन पहले उन्हें अपनी फसल का 3750 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिला था। लेकिन सोमवार को उसी फसल का दाम घटकर करीब 3300 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया।
किसानों का कहना है कि इतनी कम अवधि में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट उनके लिए बड़े नुकसान का सौदा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी में व्यापारियों की मनमानी चल रही है और किसानों को सही कीमत नहीं मिल रही है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने मंडी के बाहर मुख्य सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया।
व्यापारियों ने कहा, भाव ऊपर से निर्धारित
किसानों के आरोपों पर व्यापारी पक्ष ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि फसलों के भाव उनके द्वारा नहीं, बल्कि ऊपर से तय किए जाते हैं। व्यापारी आशीष माहेश्वरी के अनुसार पिछले कुछ दिनों से फसलों के दाम लगातार बढ़ रहे थे, लेकिन सोमवार को लगभग 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापारियों ने नीलामी बंद नहीं की थी, बल्कि किसानों के विरोध और हंगामे की वजह से नीलामी की प्रक्रिया प्रभावित हुई। व्यापारियों का कहना है कि वे सिर्फ तय दरों के आधार पर खरीद करते हैं और भाव में होने वाले उतार-चढ़ाव पर उनका नियंत्रण नहीं है।
प्रशासन की हस्तक्षेप से खत्म हुआ जाम
चक्काजाम की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन सक्रिय हुआ और एसडीएम क्षितिज शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों और व्यापारियों दोनों पक्षों से बातचीत की और स्थिति को शांत करने की कोशिश की।
एसडीएम ने किसानों की समस्याएं सुनीं और उन्हें आश्वासन दिया कि फसल के दाम और मंडी व्यवस्था से जुड़ी उनकी शिकायतों पर आगे चर्चा करके समाधान खोजा जाएगा। समझाइश के बाद किसानों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया, जिसके बाद सड़क पर यातायात और मंडी की नियमित गतिविधियां फिर से शुरू हो गईं।
निष्कर्ष: दामों की अनिश्चितता से बढ़ी किसानों की चिंता
विदिशा की इस घटना ने एक बार फिर फसलों के दामों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव के मुद्दे को सामने ला दिया है। किसान लागत के अनुपात में उचित मूल्य न मिलने से परेशान हैं, जबकि व्यापारी खुद को तय दरों का पालन करने तक सीमित बताते हैं।
प्रशासन ने फिलहाल स्थिति संभाल ली है और समाधान का आश्वासन भी दिया है, लेकिन किसानों की वास्तविक राहत तभी संभव होगी जब फसल मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसानों को स्थिर और न्यायसंगत कीमत सुनिश्चित की जा सके।
Arvind Vishwakarma