वृंदावन की सुदामा कुटी का शताब्दी महोत्सव शुरू, RSS प्रमुख मोहन भागवत होंगे शामिल

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वृंदावन की सुदामा कुटी का शताब्दी महोत्सव शुरू, RSS प्रमुख मोहन भागवत होंगे शामिल

वृंदावन में सुदामा कुटी आश्रम का शताब्दी महोत्सव प्रारंभ

वृंदावन स्थित सुदामा कुटी आश्रम के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शताब्दी महोत्सव की शुरुआत हो गई है। यह आश्रम वर्ष 1926 में स्थापित किया गया था और अब इसका शताब्दी महामहोत्सव 10 दिनों तक आयोजित किया जाएगा।

शोभायात्रा के साथ महोत्सव का शुभारंभ

शनिवार सुबह सुदामा कुटी आश्रम से शोभायात्रा निकाली गई। महंत सुतीक्ष्ण दास महाराज रथ पर सवार होकर क्षेत्र में भ्रमण के लिए निकले। यह शोभायात्रा विभिन्न चौराहों से होती हुई दोपहर लगभग 3 बजे सुदामा कुटी आश्रम वापस पहुंचेगी।

मोहन भागवत करेंगे औपचारिक शुरुआत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 10 जनवरी को दोपहर 3:30 बजे सुदामा कुटी पहुंचेंगे। वे सुदामा कुटी शताब्दी महोत्सव की आधिकारिक शुरुआत करेंगे और यहां आयोजित यज्ञ एवं पूजन कार्यक्रमों में स्वयं शामिल होंगे।

10 दिन तक धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम

आश्रम के महंत नाभापीठाधीश्वर सुतीक्ष्णदास महाराज के अनुसार शताब्दी महामहोत्सव के तहत 10 दिनों तक विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें हजारों लोगों के पहुंचने की अपेक्षा है। हर दिन सुबह 8 से 10 बजे तक श्रीराम महायज्ञ होगा। पूरे आयोजन में 11 टन हवन सामग्री और 200 पीपा देशी घी का उपयोग किया जाएगा।

शाम के समय भजन-कीर्तन के कार्यक्रम होंगे, जिनमें प्रतिदिन अलग-अलग संत शामिल होंगे। यमुना किनारे विशेष पूजा स्थल तैयार किए गए हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 10 हजार लोगों के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है। आश्रम में यह परंपरा मानी जाती है कि यहां से कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं लौटता और 24 घंटे सेवा जारी रहती है।

VVIP सुरक्षा और व्यवस्थाएं

सुदामा कुटी, बांके बिहारी मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर और गोवर्धन पर्वत से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वीवीआईपी आवाजाही को ध्यान में रखते हुए परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।

राजनीतिक और धार्मिक हस्तियों को आमंत्रण

शताब्दी महोत्सव 10 दिनों तक चलेगा, जिसमें चार राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होने की संभावना है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रण भेजा गया है। इससे पहले वर्ष 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी सुदामा कुटी पहुंच चुकी हैं। वे विशेष ट्रेन से दिल्ली से वृंदावन आई थीं।

महामहोत्सव के दौरान संत समाज का बड़ा जमावड़ा होगा। जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी, बाबा रामदेव, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री, कैलाशानंदगिरी महाराज और जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज सहित कई प्रमुख संतों को आमंत्रित किया गया है।

सुदामा कुटी की स्थापना और सेवा परंपरा

सुदामा कुटी आश्रम की स्थापना सुदामादास महाराज ने वर्ष 1926 में की थी। यह आश्रम वृंदावन के बंसीवट और गोपेश्वर महादेव मंदिर के बीच स्थित है, जहां हजारों संतों की निःशुल्क सेवा की जाती है।

आश्रम के महंत अमरदास महाराज के अनुसार सुदामादास महाराज का जन्म वर्ष 1899 में बिहार के गोपालगंज जिले के छिपाया गांव में हुआ था। वे पहले कुछ समय अयोध्या में रहे, जिसके बाद 1926 में वृंदावन आए और तब से ही संत सेवा में जुट गए। सुदामा कुटी में कई मंदिर स्थित हैं, जहां सुबह से शाम तक भजन-कीर्तन का क्रम चलता रहता है। आश्रम से जुड़े संत गोशाला में गोसेवा भी करते हैं।

आश्रम की सामाजिक और धार्मिक भूमिका

सुदामा कुटी आश्रम में निरंतर चलने वाली सेवा, भंडारा और धार्मिक कार्यक्रमों के कारण यह क्षेत्र का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। शताब्दी महोत्सव के माध्यम से आश्रम की 100 वर्ष की सेवा परंपरा और संतों की निरंतर सेवा को विशेष रूप से रेखांकित किया जा रहा है।

Navjeet Kaur