मुख्यमंत्री योगी ने 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए, पुलिस सुधारों का ब्योरा दिया
मुख्यमंत्री के प्रमुख बिंदु
लखनऊ के लोकभवन में रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस उपनिरिक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।
मुख्यमंत्री ने नौ साल पुराना वाकया सुनाते हुए बताया कि फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के लिए जमीन तलाशते समय तत्कालीन डीजीपी ने पुलिस की जमीन पर कब्जे की जानकारी दी। वे पुलिस के घोड़े देखने गए तो एक घोड़ा उन्हें देखते ही गिर पड़ा, जिससे वे सोचने लगे कि यदि वे उस पर सवार होते तो क्या होता।
उन्होंने कहा कि आज कोई किसी बेटी को छेड़ने का दुस्साहस नहीं कर सकता; अगर करेगा तो अंजाम वह जानता है, अन्यथा वह अपने डेथ वॉरेंट पर खुद हस्ताक्षर कर रहा है।
योगी ने 2017 से पहले के हालात गिनाए: लोग यूपी की पहचान बताने में झिझकते थे, बरेली, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर में लंबे दंगे और कर्फ्यू रहे, माफिया का दबदबा इतना था कि न्यायिक अधिकारियों के वाहन तक रोके जाते थे। अब कोई माफिया असलहा लहराते खुलेआम नहीं घूम सकता और न ही दंगा करने का साहस कर सकता है। पहले साधन वाले बेटियों को बाहर पढ़ाते थे, बाकी मजबूरन घर बैठाते थे क्योंकि शोहदे छेड़ते थे।
भर्ती में भाई-भतीजावाद हावी था, आधे से ज्यादा पुलिस पद खाली थे, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की रोक थी, चार लाख की जरूरत के मुकाबले दो लाख पुलिसकर्मी थे।
पुलिस बैरक बदहाल थे, लखनऊ में पुलिसकर्मी खपरैल के नीचे सोते मिले। इसके बाद हर जिले में बैरक बने, 56 जिलों में बड़े बैरक बने, दशकों से लंबित पुलिस लाइनों का निर्माण हुआ। पीएसी की 3
Adarsh Chaurasiya