टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाना गैरकानूनी बताया, दोनों नॉमिनी की सहमति अनिवार्य

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टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाना गैरकानूनी बताया, दोनों नॉमिनी की सहमति अनिवार्य

टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को गैरकानूनी घोषित किया

टाटा ट्रस्ट ने रविवार को जारी बयान में एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के लिए टाटा संस का चेयरमैन पुनर्नियुक्त करने के फैसले को गैरकानूनी बताया है। ट्रस्ट के अनुसार कंपनी के नियमों के मुताबिक चेयरमैन पद के लिए उसके दोनों प्रतिनिधियों की सहमति अनिवार्य है। टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास होने के कारण इस विरोध का असर कंपनी के नेतृत्व संबंधी फैसले पर पड़ सकता है।

टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार किसी भी बड़े फैसले या प्रस्ताव को मंजूरी के लिए टाटा ट्रस्ट के नामित डायरेक्टर्स के वोट अनिवार्य हैं। 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया, जबकि ट्रस्ट के दूसरे नामित डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने इसका समर्थन किया। पूरे बोर्ड में प्रस्ताव के पक्ष में 4 और विपक्ष में 1 वोट पड़ा। ट्रस्ट का कहना है कि जब बोर्ड में उसके दो प्रतिनिधि हैं तो बहुमत का मतलब दो वोट होता है, न कि एक। ऐसे में यह शर्त पूरी नहीं हुई और प्रस्ताव खारिज माना जाएगा।

टाटा ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई प्रस्ताव नियम के तहत पहले ही खारिज हो चुका हो तो चेयरमैन अपने स्पेशल वोट का इस्तेमाल करके उसे दोबारा मंजूर नहीं करा सकते। ट्रस्ट के अनुसार दोनों प्रतिनिधियों के अलग-अलग वोट देने से कोई भ्रम या अड़चन पैदा नहीं हुई थी। नियम के मुताबिक जवाब पहले से ही 'ना' था। चेयरमैन का स्पेशल वोट सिर्फ तब काम आता है जब पक्ष और विपक्ष में बराबर-बराबर वोट पड़े हों, खारिज हो चुके फैसले को बदलने के लिए नहीं।

टाटा ट्रस्ट ने साइरस मिस्त्री मामले का हवाला देते हुए याद दिलाया कि उस समय टाटा संस ने खुद सुप्रीम कोर्ट में ट्रस्ट के विशेष वोटिंग अधिकारों का समर्थन किया था। ट्रस्ट का कहना है कि तब टाटा संस ने माना था कि ये नियम बड़े शेयरहोल्डर्स यानी ट्रस्ट के हक की रक्षा के लिए जरूरी हैं। अब टाटा संस अपने ही उस पुराने रुख से पीछे नहीं हट सकती जिसके बचाव के लिए वह देश की सबसे बड़ी अदालत तक गई थी।

कार्यकाल विस्तार की समयरेखा और सेवानिवृत्ति नीति

चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है। उन्होंने 12 अगस्त 2026 को कहा था कि वे अगला कार्यकाल नहीं लेंगे। इसके बाद नॉमिनेशन कमेटी ने 3 सितंबर को उनसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया। 17 सितंबर को चंद्रशेखरन तैयार हो गए और बोर्ड ने उनका कार्यकाल 2032 तक बढ़ाने का फैसला किया। इस फैसले को अभी वार्षिक आम बैठक की मंजूरी मिलना बाकी है।

टाटा ग्रुप में पहली बार किसी ग्रुप एग्जीक्यूटिव को 65 साल की तय सेवानिवृत्ति उम्र के बाद भी पद बनाए रखने पर सहमति बनी है। टाटा ग्रुप की पॉलिसी के मुताबिक एग्जीक्यूटिव आमतौर पर 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं, हालांकि नॉन-एग्जीक्यूटिव पद पर वे 70 साल तक रह सकते हैं। चंद्रशेखरन अभी 63 साल के हैं। अगर वे चेयरमैन बने रहेंगे तो उनका नया कार्यकाल 2032 में खत्म होगा, तब वे 70 साल के होंगे। चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में पहली बार टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे।

Bhavanesh Soni