3900 करोड़ के भारतमाला प्रोजेक्ट का ब्रिज धंसा, घटिया निर्माण पर उठे सवाल
इंदौर से एदलाबाद तक बन रहे राष्ट्रीय राजमार्ग (भारतमाला परियोजना) पर खरगोन जिले के बासवां गांव के पास खिरकिया नदी पर नवनिर्मित ब्रिज का बीच वाला हिस्सा धंस गया। यह ब्रिज लगभग दो महीने पहले ही बनकर तैयार हुआ था और इस पर अभी ट्रैफिक भी शुरू नहीं हुआ था। ब्रिज की स्लैब धंसने से निर्माण की गुणवत्ता और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
निर्माण में गुणवत्ता की कमी
ग्रामीणों और राहगीरों ने ब्रिज की स्लैब में महज 10 एमएम मोटाई के सरिये का इस्तेमाल देखा, वह भी सिर्फ दो लेयर में। इसके अलावा, कंक्रीट की मोटाई भी केवल 4 इंच तक सीमित पाई गई। जानकारों के अनुसार, यह गुणवत्ता एक सामान्य घर की छत बनाने के लिए भी अपर्याप्त है।
लागत और ठेकेदार
इस 203 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे (भारतमाला परियोजना) के निर्माण की कुल लागत 3900 करोड़ रुपए है। ब्रिज धंसने वाले धनगांव से बलवाड़ा प्रोजेक्ट के 40 किलोमीटर हाईवे की लागत 1001.69 करोड़ रुपए है। इस प्रोजेक्ट का ठेका जीएचवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (GHV India) को मिला है, जिसने आगे काम पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर दिया है।
लापरवाही छिपाने का प्रयास
ब्रिज धंसने के बाद, ठेकेदार के कर्मचारियों ने खामियां छिपाने के लिए धंसी हुई जगह पर बारदान (कट्टों) बिछाकर मिट्टी डाल दी। इसके आसपास पत्थरों का ढेर लगाकर बैरिकेड लगा दिए गए। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए वीडियो बनाए।
NHAI और कंपनी का पक्ष
यह प्रोजेक्ट पहले NHAI की इंदौर यूनिट के अधीन था, लेकिन काम में देरी के कारण इसे खंडवा यूनिट को हैंडओवर कर दिया गया था। इंदौर यूनिट के कार्यकाल में बने इस ब्रिज के धंसने पर खंडवा यूनिट के अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। पेटी कांट्रैक्टर कंपनी केदारेश्वर और मुख्य निर्माण कंपनी जीएचवी इंडिया के प्रोजेक्ट मैनेजर रुद्रा हजांगे ने शुरू में अनभिज्ञता जताई। हालांकि, बाद में हजांगे ने बताया कि एक ओवरलोडेड वाहन फंसने के कारण उसे हटाने के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ब्रिज की छत का एक हिस्सा तोड़ा गया था और उसकी मरम्मत जारी है। उन्होंने गुणवत्ता से समझौता न करने का दावा किया।
Vivek Singh