सुप्रीम कोर्ट: AI नहीं ले सकता वकील-जज की जगह, AI-जेनरेटेड सबूतों पर फैसला 'गलत'
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने हाल ही में कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) किसी वकील के प्रशिक्षित दिमाग और जज की नैतिक जिम्मेदारी का स्थान नहीं ले सकता। उन्होंने तेलंगाना में एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस नाथ ने स्वीकार किया कि अगर समझदारी से इस्तेमाल किया जाए तो AI समय बचा सकता है और कानूनी काम के कुछ पहलुओं को अधिक आसान बना सकता है, लेकिन इसे कानून बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
जस्टिस विक्रम नाथ ने इस बात पर भी जोर दिया कि AI के गलत इस्तेमाल की वजह से न्यायिक व्यवस्था को इससे पूरी तरह दूरी नहीं बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि AI केवल एक उपकरण है और इसे एक उपकरण ही रहना चाहिए। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जज सतीश चंद्र शर्मा और तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य जज जस्टिस अपारेष कुमार सिंह ने भी अपने विचार साझा किए।
एक अन्य घटनाक्रम में, सुप्रीम कोर्ट ने 2 मार्च को एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार सबूतों के आधार पर फैसला लिखना बिल्कुल गलत है। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसका सीधा असर न्याय प्रक्रिया पर पड़ता है और यह कोई साधारण गलती नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को निर्धारित की गई है।
यह मामला अगस्त 2023 में आंध्र प्रदेश की एक ट्रायल कोर्ट द्वारा विवादित प्रॉपर्टी केस में AI से बनी तस्वीर के आधार पर दिए गए फैसले से जुड़ा है। इस फैसले को पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने जनवरी 2024 में खारिज कर दिया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी। इससे पहले 17 फरवरी को भी सुप्रीम कोर्ट ने AI टूल से तैयार याचिकाएं दायर करने के बढ़ते चलन पर चिंता जताई थी, जो न्याय प्रक्रिया में AI के दुरुपयोग की बढ़ती आशंकाओं को दर्शाता है।
Sachin Saxena