अमित शाह बोले- पूरे देश से घुसपैठिए भगाएंगे

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अमित शाह बोले- पूरे देश से घुसपैठिए भगाएंगे

नौगांव में अमित शाह का दौरा, बटाद्रवा परियोजना का शुभारंभ

असम के नौगांव जिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बटाद्रवा पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन करते हुए घुसपैठ, असम के इतिहास और क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर पर महत्वपूर्ण बयान दिए। कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी मौजूद रहे।

घुसपैठियों पर सख्त रुख और असम मॉडल

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों से करीब एक लाख बीघा जमीन को मुक्त करवाया है। उन्होंने इसे एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि इसी मॉडल पर काम करते हुए पूरे देश से घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा। शाह के अनुसार, अवैध घुसपैठ न केवल सुरक्षा के लिए, बल्कि सीमावर्ती इलाकों की demography और संसाधनों के लिए भी चुनौती है।

गोपीनाथ बोरदोलोई की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख

कार्यक्रम में शाह ने असम के पहले मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी गोपीनाथ बोरदोलोई को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि अगर बोरदोलोई न होते, तो आज असम और पूरा पूर्वोत्तर भारत का हिस्सा नहीं होता। शाह ने दावा किया कि गोपीनाथ बोरदोलोई ने ही तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को असम को भारत के साथ बनाए रखने के लिए मजबूर किया था। उनके अनुसार, बोरदोलोई की दूरदर्शिता और संघर्ष के कारण असम और नॉर्थ ईस्ट भारत की मुख्यधारा में बने रहे।

227 करोड़ की बटाद्रवा पुनर्विकास परियोजना

अमित शाह ने बटाद्रवा थान में 227 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकसित श्रीमंत शंकरदेव आविर्भाव क्षेत्र का लोकार्पण किया। यह स्थान महान वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव की जन्मभूमि माना जाता है और असम की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है।

कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री का पारंपरिक सत्त्रिया नृत्य और संगीत के साथ स्वागत किया गया। उन्होंने मुख्य परिसर में स्थित गुरु आसन वाले भवन में जाकर दर्शन किए और स्थानीय धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान प्रकट किया।

श्रीमत शंकरदेव आविर्भाव क्षेत्र के पुनर्विकास का उद्देश्य

इस परियोजना को 2021-22 के असम राज्य बजट में स्वीकृति दी गई थी। पुनर्विकास का मुख्य लक्ष्य श्रीमंत शंकरदेव के आदर्शों, उनके जीवन दर्शन और कलात्मक योगदान को नई पीढ़ी तक आधुनिक तरीके से पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह परियोजना न केवल शंकरदेव की विरासत के सम्मान का प्रतीक है, बल्कि असम के नामघर, सत्र और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। उनके अनुसार, नया परिसर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा।

निष्कर्ष: सांस्कृतिक संरक्षण के साथ सुरक्षा संदेश

नौगांव में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से केंद्र सरकार ने दोहरे संदेश दिए। एक ओर, श्रीमंत शंकरदेव की जन्मभूमि के पुनर्विकास के जरिए असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर, घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख दिखाते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा गया। गोपीनाथ बोरदोलोई की ऐतिहासिक भूमिका की याद दिलाकर शाह ने यह संकेत दिया कि असम और पूर्वोत्तर का भविष्य राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गौरव और सुरक्षित सीमाओं से जुड़ा है।

Adarsh Chaurasiya