अमित शाह का बस्तर दौरा: नक्सलियों का आत्मसमर्पण और दशहरा महोत्सव
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान वे बस्तर दशहरा महोत्सव में भाग लेंगे और नक्सलवाद उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा करेंगे। शाह का यह दौरा कई पहलुओं से महत्वपूर्ण है, जिसमें नक्सलियों का आत्मसमर्पण और आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देना शामिल है।
शाह का स्वागत और दशहरा महोत्सव
शाह शुक्रवार रात रायपुर पहुंचे और वहां एक निजी होटल में ठहरे। शनिवार को वे बस्तर दशहरा महोत्सव में हिस्सा लेंगे। यह महोत्सव बस्तर की आदिवासी परंपराओं और संस्कृति का प्रतीक है। शाह को बस्तर दशहरा समिति ने निमंत्रण दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। समिति ने उन्हें मां दंतेश्वरी की तस्वीर भी भेंट की।
इस साल बस्तर दशहरे का मुरिया दरबार 4 अक्टूबर को जगदलपुर के सिरहासार भवन में आयोजित होगा, जहां आदिवासी समुदाय अपनी समस्याएं और सुझाव प्रशासन को प्रस्तुत करेंगे। शाह इस दौरान आदिवासी प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे और नक्सल उन्मूलन के मिशन 2026 की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
नक्सलियों का आत्मसमर्पण
अमित शाह के दौरे से ठीक दो दिन पहले बीजापुर जिले में 103 नक्सलियों ने सरेंडर किया। इनमें 49 नक्सलियों पर कुल 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM), प्लाटून पार्टी कमेटी मेंबर (PPCM), और एरिया कमेटी मेंबर (ACM) जैसे बड़े कैडर के नक्सली शामिल हैं।
गौरतलब है कि शाह ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि नक्सली आत्मसमर्पण करें तो उनका स्वागत रेड कार्पेट पर होगा, अन्यथा हिंसा का जवाब गोली से दिया जाएगा। इस वर्ष अब तक बीजापुर जिले में 421 नक्सली गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि 410 माओवादियों ने हथियार डाल दिए हैं।
विपक्ष का आरोप
कांग्रेस ने नक्सलियों के इस आत्मसमर्पण को फर्जी करार दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार इसे एक इवेंट की तरह पेश कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों की जानकारी सार्वजनिक करे।
बैज ने यह भी आरोप लगाया कि बस्तर में कई फर्जी सरेंडर और एनकाउंटर हुए हैं, जिसमें निर्दोष आदिवासियों को जेल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के आत्मसमर्पण को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा होता है।
नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन
अमित शाह ने पहले ही घोषणा की थी कि 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। इस डेडलाइन के बाद बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ अभियानों में तेजी देखी जा रही है। शाह ने कहा है कि बस्तर अब नक्सलवाद की गिरफ्त से बाहर निकलकर शांति और विकास की ओर बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
अमित शाह का बस्तर दौरा न केवल नक्सलवाद उन्मूलन के अभियानों की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बस्तर की अद्वितीय संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय मंच पर पेश करने का अवसर भी है। यह दौरा इस क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।