अंता विधानसभा उपचुनाव पर वसुंधरा राजे की भूमिका अहम
राजस्थान के बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में टिकट को लेकर अभी तक एकराय नहीं बन पाई है। इस सीट पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से उनके आवास पर मुलाकात की। यह सीट वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह के लोकसभा क्षेत्र में आती है, जिससे राजे की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव से जुड़ी हुई है।
बीजेपी में प्रत्याशी चयन को लेकर मतभेद
अंता विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया को घोषित कर दिया है। वहीं, बीजेपी में टिकट को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वसुंधरा राजे इस सीट पर कंवरलाल मीणा के परिवार से टिकट देने की इच्छुक हैं, लेकिन पार्टी में इस पर सहमति नहीं बन रही है। कंवरलाल मीणा की आपराधिक छवि और बाहरी होने के कारण स्थानीय नेता उनका विरोध कर रहे हैं।
स्थानीय नेताओं की दावेदारी
अंता सीट पर स्थानीय नेता आनंद गर्ग और नंदलाल सुमन ने भी अपनी दावेदारी पेश की है। जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी को भी एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, राजे उनके नाम पर सहमत नहीं हैं। प्रभुलाल सैनी पहले भी अंता सीट से विधायक रह चुके हैं, लेकिन बाहरी होने के कारण उनके विरोध की संभावना है।
राजे की राय को महत्व देने की कोशिश
बीजेपी नेतृत्व राजे की राय को महत्व देने के लिए विचार-विमर्श कर रहा है। हाड़ौती अंचल को राजे का क्षेत्र माना जाता है, और इस सीट पर उनकी भूमिका पार्टी के लिए अहम है। पार्टी अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है, क्योंकि राजे की राय और समर्थन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।
कांग्रेस की रणनीति
दूसरी ओर, कांग्रेस ने बारां जिले की अंता सीट से प्रमोद जैन भाया को उम्मीदवार बनाया है। भाया साल 2023 में बीजेपी के कंवरलाल मीणा से हार गए थे। अब कांग्रेस ने उन्हें फिर से मैदान में उतारा है।
निष्कर्ष
अंता विधानसभा उपचुनाव न केवल बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वसुंधरा राजे की प्रतिष्ठा के लिए भी एक चुनौतीपूर्ण चुनाव साबित हो सकता है। पार्टी को जल्द ही निर्णय लेकर अपने प्रत्याशी का चयन करना होगा, ताकि चुनावी तैयारियों में गति लाई जा सके।