असंतुलित विकास: मोहन भागवत का चिंतन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने जयपुर में आयोजित दीनदयाल स्मृति व्याख्यान में असंतुलित विकास और एकात्म मानव दर्शन पर विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि दुनियाभर में 4% जनसंख्या 80% संसाधनों का उपयोग कर रही है, जबकि 96% लोग इससे वंचित हैं।
असंतुलित विकास की चुनौती
भागवत ने कहा कि विकास हो रहा है, लेकिन इसका लाभ बेहद कम लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने जोर दिया कि जैसे-जैसे विकास बढ़ रहा है, अमीर और अमीर हो रहे हैं, जबकि गरीब और गरीब। यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक मुद्दा बन चुकी है।
एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिकता
उन्होंने 60 साल पहले प्रस्तुत एकात्म मानव दर्शन को आज भी उतना ही प्रासंगिक बताया। भागवत ने कहा कि व्यक्ति का विकास परिवार, समाज और राष्ट्र से जुड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल स्वयं के लिए जीना जीवन का सार नहीं है, बल्कि समाज के लिए जीना ही मानवता का असली उद्देश्य है।
गोविंददेवजी मंदिर में दर्शन
कार्यक्रम से पहले मोहन भागवत जयपुर के गोविंददेवजी मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने ठाकुर श्री राधा-गोविंद देव जी महाराज की राजभोग झांकी में दर्शन किए। मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने उनका स्वागत किया और उन्हें शॉल, दुपट्टा, प्रसाद और मंदिर का लघु स्वरूप भेंट किया।
निष्कर्ष
मोहन भागवत ने असंतुलित विकास और मानवता की चुनौतियों पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने समाज के लिए समर्पित जीवन का महत्व बताया और एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिकता पर जोर दिया।
Amit Pateria