बड़ा तालाब में अतिक्रमण पर एनजीटी सख्त, सर्वे प्रक्रिया जारी
भोपाल के बड़ा तालाब में अतिक्रमण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीमांकन प्रक्रिया को तेज करने और दो सप्ताह में रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला पर्यावरणविद राशिद नूर द्वारा दाखिल याचिका के बाद सामने आया है।
सीमांकन और सर्वे की स्थिति
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने तालाब के सीमांकन के लिए चार एसडीएम को जिम्मेदारी सौंपी है। बैरागढ़ क्षेत्र में सीमांकन शुरू हो चुका है और अगले दो दिनों में इसे पूरा करने का दावा किया गया है। हालांकि, बिसनखेड़ी, गौरागांव और सूरजनगर जैसे इलाकों में अधिक अतिक्रमण होने के बावजूद अभी तक टीम गठित नहीं की गई है। टीटी नगर एसडीएम अर्चना रावत ने कहा कि शुक्रवार तक टीम बनाकर सर्वे शुरू किया जाएगा।
अवैध निर्माण और फर्जी मुनारें
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, एफटीएल (फुल टैंक लेवल) मुनार के पास सैकड़ों अवैध निर्माण, फार्म हाउस और रिसॉर्ट्स बने हुए हैं। बड़ा तालाब के किनारों पर फर्जी मुनारें लगाई गई हैं, जिससे अतिक्रमण को बढ़ावा मिला है। भोपाल म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) के नाम वाली और खाली सफेद मुनारों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
एनजीटी की सख्ती और पर्यावरणीय महत्व
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 का पालन मध्यप्रदेश के सभी जलाशयों पर अनिवार्य है। बड़ा तालाब को रामसर साइट के रूप में मान्यता प्राप्त है, जहां शहरी सीमा में 50 मीटर और ग्रामीण सीमा में 250 मीटर के भीतर निर्माण प्रतिबंधित है।
यह मामला केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि भोपाल के पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। तालाब में 41 नालों से सीवेज गिर रहा है और 227 अतिक्रमण अब तक नहीं हटाए गए हैं। एनजीटी ने इस संबंध में रिपोर्ट जमा करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।