ट्रम्प ने भारतीय चुनाव आयुक्त के सवाल का हवाला देकर सेव अमेरिका एक्ट पर जोर दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को भारत की चुनाव व्यवस्था का हवाला देते हुए ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पास कराने की अपील की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से पूछा था कि अमेरिका में वैध फोटो ID के बिना चुनाव कैसे हो सकते हैं।
क्या है सेव अमेरिका एक्ट
सेव अमेरिका एक्ट अमेरिका में मतदाता पंजीकरण और मतदान से जुड़े नियमों को सख्त करने वाला विधेयक प्रस्ताव है। इसके तहत वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण और मतदान के समय फोटो ID दिखाना जरूरी होगा। विधेयक में डाक से वोट देने की प्रक्रिया को काफी सीमित करने की बात कही गई है।
यह विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पारित हो चुका है, लेकिन सीनेट में इसे अब तक मंजूरी नहीं मिली है। इस मुद्दे पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों में मतभेद हैं। ट्रम्प लगातार इसे पास कराने पर जोर देते रहे हैं और दावा करते हैं कि इससे चुनावी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
अमेरिका में विवाद क्यों
अमेरिका में वोटर ID को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस चल रही है। समर्थकों का कहना है कि फोटो ID और नागरिकता के दस्तावेज चुनाव की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करेंगे। विरोधियों का तर्क है कि अमेरिका में गैर-नागरिकों का मतदान पहले से प्रतिबंधित है और सख्त दस्तावेजी नियमों से ऐसे मतदाता प्रभावित हो सकते हैं, जिनके पास जन्म प्रमाणपत्र या वैध पासपोर्ट जैसे दस्तावेज नहीं हैं।
बाइपार्टिसन पॉलिसी सेंटर के अनुसार, अमेरिका में करीब 12% पंजीकृत मतदाताओं के पास आम तौर पर स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजी प्रमाण नहीं हैं।
अन्य देशों में फोटो ID के नियम
फोटो ID को लेकर विकसित देशों में एक जैसा नियम नहीं है। ब्रिटेन में कुछ चुनावों में मतदान केंद्र पर फोटो ID दिखाना अनिवार्य है, जबकि स्कॉटलैंड और वेल्स के कुछ स्थानीय चुनावों में इसकी जरूरत नहीं होती। कनाडा में पहचान और पता साबित करना जरूरी है, लेकिन सिर्फ फोटो ID ही जरूरी नहीं है। मतदाता एक फोटो ID या दो अन्य मान्य दस्तावेज दिखा सकता है। ID न होने पर कुछ परिस्थितियों में दूसरा मतदाता उसकी पहचान की पुष्टि कर सकता है।
Sharad Shrivastava