TISS दीक्षांत में CJI सूर्यकांत नहीं होंगे मुख्य अतिथि, टाटा मेमोरियल निदेशक को बुलाया

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TISS दीक्षांत में CJI सूर्यकांत नहीं होंगे मुख्य अतिथि, टाटा मेमोरियल निदेशक को बुलाया

TISS दीक्षांत में मुख्य अतिथि बदले गए

मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के 86वें दीक्षांत समारोह में अब मुख्य अतिथि CJI सूर्यकांत नहीं होंगे। 22 अगस्त को होने वाले समारोह में उनकी जगह टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. सीएस प्रमेश मुख्य अतिथि होंगे।

पहले CJI को बनाया गया था मुख्य अतिथि

पहले CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाया गया था और उन्हें भाषण देना था। यह फैसला ऐसे समय आया है जब हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में 450 से अधिक छात्रों ने CJI को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था।

NALSAR विरोध और BCI का निर्देश

NALSAR यानी नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च, हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी है। वहां करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं। इनमें से लगभग 450 छात्रों ने प्रशासन को पत्र लिखकर CJI का न्योता वापस लेने की मांग की थी।

इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने लॉ यूनिवर्सिटी के पूरे बैच के छात्रों को वकील के तौर पर एनरोल करने से रोकने का निर्देश दिया था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद BCI ने अपना आदेश वापस ले लिया।

TISS समारोह पहले टाला गया था

TISS का दीक्षांत समारोह पहले 2 अगस्त को होना था। आयोजन से दो दिन पहले संस्थान ने 'अप्रत्याशित परिस्थितियों' का हवाला देकर इसे टाल दिया। संस्थान ने कहा था कि उस समय समारोह के लिए अनुकूल माहौल नहीं था। छात्रों, फैकल्टी, कर्मचारियों और मेहमानों की सुरक्षा और सामान्य कैंपस गतिविधियां प्रभावित हो सकती थीं। CJI के दौरे को लेकर संभावित विरोध और सुरक्षा व्यवस्था की चिंता भी थी।

छात्रों की नाराजगी CJI की टिप्पणी को लेकर

छात्रों की नाराजगी CJI की पिछले महीने की एक टिप्पणी को लेकर थी। यह टिप्पणी दिल्ली में NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी।

CJI सूर्यकांत के हालिया बयान

15 मई: CJI ने कहा था कि कुछ युवा कॉकरोच की तरह भटक रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कुछ युवाओं को पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा, वे मीडिया, सोशल मीडिया, RTI और दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बनकर हर किसी पर हमला करने लगते हैं।

16 जुलाई को अभिजीत दीपके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से सोशल मीडिया पेज बनाया। इसने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 35 दिनों तक प्रदर्शन किया।

22 जुलाई: एक वकील ने CJI की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच के सामने जनहित याचिका लगाई। याचिकाकर्ता ने छात्रों के मुद्दे और पुलिस कार्रवाई के वीडियो का हवाला दिया। इस पर CJI ने कहा, 'हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है, समय नहीं है।' दोबारा अनुरोध पर उन्होंने कहा, 'हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।'

24 जुलाई: प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस हिंसा से जुड़ी दो याचिकाओं का जिक्र हुआ। CJI ने कहा कि इसे लिस्टिंग में आने दें, इस पर सुनवाई करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने लाठीचार्ज से जुड़ी किसी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया; कोई रिट याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी।

बार काउंसिल इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी दीक्षांत विवाद के बाद लॉ स्टूडेंट्स से माफी मांगी है।

Navjeet Kaur