शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने सरकार पर साधा निशाना: 'आस्था कुचलने का दुस्साहस न करें'
भिंड। प्रयागराज के माघ मेले से जुड़े एक धरना प्रकरण को लेकर शंकराचार्य सदानंद सरस्वती महाराज ने भिंड में सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। खनेता धाम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सत्ताधारी शासक नहीं, बल्कि जनता के सेवक होते हैं।
प्रयागराज घटना पर आक्रामक तेवर
भिंड जिले के खनेता धाम स्थित श्री रघुनाथ मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य सदानंद सरस्वती महाराज ने प्रयागराज धरना प्रकरण को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाए। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाएं दर्शाती हैं कि सत्ता के कुछ हिस्सों में स्वयं को सेवक नहीं, बल्कि शासक समझने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो लोकतंत्र और सनातन परंपरा दोनों के लिए घातक है।
गंगा स्नान पर रोक आस्था पर सीधा प्रहार
शंकराचार्य ने इस बात पर जोर दिया कि प्रयागराज में गंगा स्नान से रोका जाना और ब्राह्मण विद्यार्थियों व साधु-संतों के साथ बल प्रयोग केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि आस्था पर सीधा प्रहार है। उन्होंने दो टूक कहा कि गंगा स्नान प्रत्येक सनातनी का अधिकार है। जब करोड़ों श्रद्धालु स्नान कर रहे थे, तब सीमित संख्या में मौजूद लोगों को रोकना और उनके साथ कठोर व्यवहार करना किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।
बात करने की बजाय बल प्रयोग पर सवाल
उन्होंने प्रश्न किया कि यदि प्रशासन को व्यवस्था या सुरक्षा की चिंता थी, तो उसका समाधान बात करके और समन्वय से निकाला जा सकता था। शंकराचार्य ने कहा कि छोटे-छोटे समूहों में श्रद्धालुओं को स्नान की अनुमति देना एक व्यावहारिक विकल्प था, लेकिन इसके बजाय बल प्रयोग किया गया। उन्होंने इसे सत्ता की हठधर्मिता और संवेदनहीनता का प्रतीक बताया। शंकराचार्य ने शिखा पकड़कर मारपीट किए जाने की घटना पर भी कड़ा आक्रोश जताया और इसे पूरे समाज का अपमान करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही वह स्वतंत्र भारत है, जहां आस्था रखने वालों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़े।
लोकतंत्र में जनता राजा होती है
शासन और सत्ता को आईना दिखाते हुए शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि लोकतंत्र में राजा जनता होती है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले राजतंत्र में राजा का पुत्र राजा बनता था, लेकिन आज जनता अपने मत से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों का चयन करती है। ऐसे में सत्ताधारियों को यह याद रखना चाहिए कि वे सेवक की भूमिका में हैं, न कि दमनकारी शासक की।
संत समाज चुप नहीं बैठेगा
शंकराचार्य ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि यदि भविष्य में भी धार्मिक गतिविधियों में अनावश्यक हस्तक्षेप और आस्था को दबाने का प्रयास किया गया, तो संत समाज चुप नहीं बैठेगा। खनेता धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ और संत समागम के मंच से दिया गया उनका यह बयान न केवल प्रशासन के लिए संदेश है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था के सम्मान की स्पष्ट मांग भी है।
Arvind Vishwakarma