भोपाल में धर्म से परे व्यापार की मिसाल

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भोपाल  में धर्म से परे व्यापार की मिसाल

भोपाल में धर्म से परे व्यापार की मिसाल

भोपाल का जुमेराती बाजार हमेशा से अपने सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन हाल ही में कुछ संगठनों ने हिंदुओं से अपील की कि वे केवल सनातनी दुकानदारों से ही सामान खरीदें। इस पर व्यापारियों और ग्राहकों का कहना है कि धर्म के नाम पर खरीदारी बांटना उचित नहीं है।

पेट का कोई धर्म नहीं होता

जुमेराती बाजार के एक दुकानदार मोहम्मद अयाज ने कहा कि धर्म से व्यापार का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले 17 वर्षों में उन्होंने कभी किसी ग्राहक को धर्म के आधार पर भेदभाव करते नहीं देखा। अयाज ने कहा, "भोपाल की खूबसूरती यही है कि यहां लोग मोहब्बत से रहते हैं। त्योहारों में यह प्यार और भाईचारा और भी बढ़ जाता है।"

त्योहारों में भाईचारे का महत्व

शाहबान अली, जो पिछले 25 वर्षों से मूर्तियों और सजावट का सामान बेच रहे हैं, ने बताया कि दिवाली उनके लिए भी खास होती है। वे पहले दिन से हिंदू ग्राहकों को शुभकामनाएं देते हैं और मिठाई बांटते हैं। उनका कहना है कि धर्म से नहीं, बल्कि भरोसे से व्यापार चलता है।

ग्राहकों का नजरिया

भोपाल के निवासी अमरदीप भालेकर और आरती जैन ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी। उनका कहना है कि दिवाली सबका त्योहार है और किसी को धर्म के आधार पर अलग करना गलत है। आरती ने कहा, "त्योहार तभी सुंदर लगता है जब सबके घर में रोशनी हो।"

धर्म से परे व्यापार की सच्चाई

मोहम्मद हारिस, जो पटाखों और खिलौनों की दुकान चलाते हैं, ने बताया कि अगर लोग केवल अपने धर्म के लोगों से खरीदारी करने लगें, तो गरीबों का जीवन कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि त्योहारों में हर घर में दीया जलना चाहिए और किसी को भूखा नहीं रहना चाहिए।

ऑनलाइन मार्केट का असर

अमित अग्रवाल, जो सजावट के सामान बेचते हैं, ने बताया कि असली चुनौती ऑनलाइन मार्केट है। उन्होंने कहा कि धर्म की बहस से अधिक नुकसान ऑनलाइन मार्केट करता है। उनके दुकान पर हिंदू-मुस्लिम दोनों ग्राहक आते हैं और वे हर त्योहार में एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं।

निष्कर्ष

भोपाल का बाजार भारतीय सांस्कृतिक विविधता और भाईचारे का प्रतीक है। यहां के लोग आपसी समझ और प्यार से त्योहार मनाते हैं, जो किसी धर्म के दायरे में नहीं बंधता। सभी का मानना है कि त्योहार तभी खूबसूरत बनता है जब हर घर में रोशनी हो और हर व्यक्ति की थाली में मिठाई हो।