बिहार चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में, दो चरणों की मांग

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बिहार चुनाव  की तैयारियां अंतिम चरण में,  दो चरणों  की मांग

बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने चुनाव से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए पटना के होटल ताज में राज्य के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठक की। तीन घंटे तक चली इस बैठक में विभिन्न दलों ने अपनी-अपनी मांगें और सुझाव प्रस्तुत किए।

बीजेपी ने की दो चरणों में चुनाव कराने की मांग

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बैठक में दो चरणों में चुनाव कराने की मांग रखी। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कम चरणों में चुनाव होने से मतदाताओं और उम्मीदवारों को असुविधा कम होगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चुनाव की घोषणा के 28 दिन बाद ही चुनाव कराए जाएं, ताकि तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

जदयू और अन्य दलों का मत

जदयू ने इस पर अलग राय रखते हुए कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था और नक्सलवाद जैसी समस्याएं नहीं हैं, इसलिए पूरे राज्य में एक ही चरण में चुनाव कराए जा सकते हैं। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और लोजपा (रामविलास) ने भी दो चरणों में चुनाव कराने की मांग का समर्थन किया।

सुरक्षा व्यवस्था की मांग

बीजेपी ने सुरक्षा प्रबंधों पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने आग्रह किया कि अति पिछड़े गांवों और दियारा क्षेत्रों में पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती की जाए। इसके अलावा, नदी और तालाब वाले इलाकों में घुड़सवार पुलिस की व्यवस्था करने की भी मांग की गई।

मतदाता जागरूकता और पारदर्शिता

बीजेपी ने यह भी सुझाव दिया कि मतदाता पर्ची समय पर वितरित की जाए, लेकिन इसे पहचान का आधार न बनाया जाए। उन्होंने वेबकास्टिंग और एसएमएस के माध्यम से मतदाताओं को जागरूक और सतर्क करने का सुझाव दिया।

पिछले चुनावों की प्रक्रिया

बैठक में पिछले चुनावों के अनुभवों पर भी चर्चा की गई। यह देखा गया कि पिछले चुनावों में चरणों की संख्या और समय सीमा का प्रभाव मतदाताओं की भागीदारी और चुनावी प्रक्रिया पर पड़ा है।

चुनाव आयोग ने सभी सुझावों और मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। आने वाले दिनों में चुनाव प्रक्रिया को लेकर और अधिक जानकारी साझा की जाएगी।

निष्कर्ष

बिहार चुनाव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, और राजनीतिक दलों ने अपनी प्राथमिकताओं और चिंताओं को सामने रखा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इन सुझावों को कैसे लागू करता है।