बिहार चुनाव में सीट शेयरिंग पर विवाद, मांझी और कुशवाहा की नाराजगी

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बिहार चुनाव  में सीट शेयरिंग पर विवाद, मांझी और कुशवाहा की नाराजगी

बिहार चुनाव: सीट शेयरिंग पर असहमति, मांझी और कुशवाहा ने जताई नाराजगी

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तैयार करना शुरू कर दिया है। लेकिन इस प्रक्रिया में सहयोगी दलों के साथ असहमति सामने आ रही है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी-अपनी सीटों की मांग रखी है, जिससे बीजेपी के लिए चुनौती बढ़ गई है।

मांझी की नाराजगी

रविवार को बीजेपी के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने पटना में पहले केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से मुलाकात की और फिर जीतन राम मांझी के आवास पर पहुंचे। हालांकि, मात्र 15 मिनट की बैठक के बाद प्रधान और अन्य नेता बाहर आ गए। मांझी ने मीडिया को बताया कि यह केवल एक औपचारिक बैठक थी और कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई।

मांझी ने पहले ही कहा था कि अगर उन्हें 15 से 20 सीटें नहीं मिलीं, तो उनकी पार्टी 100 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) का लक्ष्य 2025 तक मान्यता प्राप्त पार्टी बनना है, जिसके लिए विधानसभा में 8 सीटें जीतना या 6% वोट हासिल करना आवश्यक है।

कुशवाहा की मांग

मांझी से मिलने के बाद धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े ने उपेंद्र कुशवाहा से भी मुलाकात की। कुशवाहा ने बैठक में 12 से 15 सीटों की मांग रखी। धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया कि इस पर विचार किया जाएगा और अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा।

बीजेपी की सख्त रणनीति

बीजेपी ने इस बार टिकट वितरण में सख्त रुख अपनाने का निर्णय लिया है। पार्टी का कहना है कि केवल उन्हीं नेताओं को टिकट दिया जाएगा, जिनकी जनता के बीच मजबूत पकड़ है और जीतने की गारंटी है। खराब परफॉर्मेंस वाले मौजूदा विधायकों का टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है।

शनिवार देर रात हुई राज्य कार्यसमिति की बैठक में संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा की गई। बैठक में 60 सिटिंग सीटों की समीक्षा की गई, जबकि बची हुई सीटों पर चर्चा आज होनी है। बैठक में संगठन के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया और रिपोर्ट के आधार पर पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजने का निर्णय लिया गया।

चुनावी दावेदारी की होड़

बीजेपी कार्यालय में टिकट की दावेदारी को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया। धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े के कार्यालय पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया और अपना-अपना बायोडाटा सौंपा। यह दिखाता है कि चुनावी मैदान में उतरने की होड़ कितनी तेज है।

निष्कर्ष

बिहार में सीट शेयरिंग को लेकर बीजेपी के लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। मांझी और कुशवाहा की मांगें पार्टी के लिए सिरदर्द बन सकती हैं। वहीं, खराब प्रदर्शन करने वाले विधायकों को हटाने और नए चेहरों को मौका देने की रणनीति से पार्टी खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अब देखना होगा कि सीट शेयरिंग का अंतिम फॉर्मूला क्या होता है और इससे चुनावी समीकरण कैसे प्रभावित होते हैं।