डिजिटल जनगणना 2027 में 33 सवाल, हर घर बनेगा डिजी डॉट मैप पर

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डिजिटल जनगणना 2027 में 33 सवाल, हर घर बनेगा डिजी डॉट मैप पर

जनगणना 2027: दो फेज में डिजिटल गणना, 33 सवालों की सूची जारी

केंद्र सरकार ने 2027 में होने वाली राष्ट्रीय जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसमें जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले 33 सवालों की सूची शामिल है, जिनमें मकान, परिवार और वाहन जैसी जानकारियां ली जाएंगी। जनगणना के समय परिवार के मुखिया को यह जानकारी प्रदान करनी होगी।

दो चरणों में पूरी होगी जनगणना प्रक्रिया

सरकार के अनुसार जनगणना दो फेज में कराई जाएगी। पहला फेज अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 के बीच चलेगा, जिसमें घरों की लिस्टिंग और उनसे जुड़ा डेटा जुटाया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को 30 दिनों की अवधि में अपना काम पूरा करना होगा।

दूसरा फेज फरवरी 2027 से शुरू होगा, जब वास्तविक आबादी की गिनती की जाएगी। इससे पहले 2021 में जनगणना प्रस्तावित थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे टाल दिया गया और अब यह 2027 में पूरी होगी। सरकार ने यह भी कहा है कि घरों की लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले लोगों को स्वयं जानकारी भरने के लिए सेल्फ एन्यूमरेशन का विकल्प दिया जाएगा।

पूरी तरह डिजिटल जनगणना और मोबाइल ऐप का उपयोग

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। लगभग 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप की मदद से जानकारी इकट्ठा करेंगे। मोबाइल ऐप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर के प्रयोग से जनगणना बड़े पैमाने पर पेपरलेस बनेगी। ये ऐप एंड्रॉइड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर काम करेंगे।

जनगणना में जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से एकत्र किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जाति की गिनती जनगणना का हिस्सा होगी। इससे पहले अंग्रेजी शासन के दौरान 1931 तक जाति आधारित जनगणना कराई जाती थी। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। पिछली जनगणना 2011 के अनुसार भारत की आबादी लगभग 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं।

हर घर के लिए ‘डिजी डॉट’ और जियो टैगिंग

नई जनगणना में देशभर के घरों को मैप पर जियो टैग कर ‘डिजी डॉट’ के रूप में दर्ज किया जाएगा। इससे डिजिटल लेआउट मैप तैयार होगा, जिसके कई व्यावहारिक उपयोग होंगे।

आपदा प्रबंधन में मदद

जियो टैगिंग से बने डिजिटल मैप बादल फटने, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान उपयोगी साबित होंगे। किसी सुदूर पहाड़ी या अन्य क्षेत्र में आपदा की स्थिति में तुरंत पता लगाया जा सकेगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं और होटलों में क्षमता के अनुसार कितने लोग हो सकते हैं। इन जानकारियों के आधार पर नौका, हेलिकॉप्टर, फूड पैकेट जैसी राहत सामग्री की व्यवस्था अधिक सटीक रूप से की जा सकेगी।

सीमा निर्धारण और परिसीमन में सहायता

जियो टैगिंग से तैयार डिजिटल मैप संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की राजनीतिक सीमाएं तय करने में भी सहायक होगा। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के संतुलित बंटवारे की स्पष्ट तस्वीर मिलेगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि समुदायों को अनुचित तरीके से अलग-अलग क्षेत्रों में न बांटा जाए। घरों के डिजी डॉट की मदद से डिलिमिटेशन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।

शहरी योजना और बुनियादी सेवाओं का विकास

शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और पार्कों की योजना बनाने में यह डिजिटल मैप महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यदि किसी क्षेत्र के लेआउट में बच्चों की संख्या अधिक दिखेगी, तो वहां पार्क और स्कूल को प्राथमिकता दी जा सकेगी। वहीं, जहां कच्चे या जर्जर मकानों की संख्या अधिक होगी, वहां मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजने की योजना बनाई जा सकेगी।

शहरीकरण और पलायन के रुझान

इस जनगणना के आधार पर बनाए गए डिजिटल मैप में आने वाले वर्षों में हुए बदलावों की तुलना अगली जनगणना में आसानी से की जा सकेगी। इससे देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन की दिशा एवं तीव्रता का विश्लेषण अधिक सटीक ढंग से किया जा सकेगा।

मतदाता सूची की शुद्धता

आधार से जुड़ी पहचान और जियो टैगिंग के संयोजन से मतदाता सूची को अधिक सटीक और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। जब वोटर किसी विशेष भौगोलिक स्थान से डिजिटल रूप से जुड़ा होगा, तो दोहरे पंजीकरण के मामलों में उसके मूल निवास की पहचान आसानी से हो सकेगी और डुप्लीकेट नाम हटाना आसान होगा।

जातिगत जनगणना को कैबिनेट की मंजूरी

सरकार ने देश में आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना कराने का फैसला किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने जाति जनगणना को मंजूरी दी है और इसे मूल जनगणना के साथ ही आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि जाति आधारित डेटा उसी प्रक्रिया का हिस्सा होगा। उल्लेख है कि इसी वर्ष के अंत में बिहार विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं, जिसके बीच यह निर्णय लिया गया है।

कुल मिलाकर, जनगणना 2027 न केवल देश की जनसंख्या और सामाजिक संरचना की नई तस्वीर पेश करेगी, बल्कि डिजिटल तकनीक और जियो टैगिंग के माध्यम से आपदा प्रबंधन, शहरी योजना, राजनीतिक परिसीमन और मतदाता सूची सुधार जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगी।

Bhavanesh Soni