धार के भोजशाला मामले में हाई कोर्ट में आज सुनवाई: ASI रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई तय होगी

· 1 min read
धार  के  भोजशाला मामले  में  हाई कोर्ट  में आज सुनवाई:  ASI रिपोर्ट  पर आगे की कार्रवाई तय होगी

धार के भोजशाला मामले में हाई कोर्ट में आज सुनवाई, ASI रिपोर्ट पर होगी आगे की कार्रवाई

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर विवाद मामले में सोमवार को हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। इस सुनवाई में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट पर याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों द्वारा दायर किए गए दावों और आपत्तियों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

ASI की वैज्ञानिक जांच और रिपोर्ट

उच्च न्यायालय के आदेश पर ASI ने 22 मार्च 2024 से लगभग 100 दिनों तक भोजशाला परिसर और उसकी 50 मीटर की परिधि में विस्तृत जांच, सर्वे और सीमित उत्खनन का कार्य किया था। इस टीम में पुरातत्वविद्, अभिलेखविद्, रसायनविद् और अन्य विशेषज्ञ शामिल थे। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुष्टि की थी कि ASI की रिपोर्ट पहले ही खोल दी गई है और उसकी प्रतियां याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध करा दी गई हैं, इसलिए इसे दोबारा अनसील करने की आवश्यकता नहीं है।

23 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट पर दो हफ्ते के भीतर अपनी आपत्तियां और सुझाव देने के निर्देश दिए थे। आज की सुनवाई में, दाखिल किए गए जवाबों के आधार पर मामले की आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

ASI रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के विभिन्न शिलालेखों के प्रमाण मिले हैं। इनमें संस्कृत-प्राकृत, नागरी लिपि के लेख के साथ-साथ अरबी-फारसी में लिखे शिलालेख भी शामिल हैं। कुछ शिलालेखों से धार्मिक गतिविधियों का संकेत मिलता है, जबकि कुछ अन्य एक शिक्षण केंद्र होने की संभावना को दर्शाते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भोजशाला परिसर में 56 अरबी-फारसी शिलालेख पाए गए हैं, जिनमें दुआएं, नाम और धार्मिक वाक्य दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त, 12वीं-16वीं सदी के संस्कृत-प्राकृत शिलालेख भी मिले हैं, जिनमें पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख शामिल हैं। रिपोर्ट में कुछ पत्थरों पर लिखावट मिटाकर दोबारा इस्तेमाल किए जाने के संकेत भी मिले हैं। ASI ने यह भी बताया है कि यह स्थल अलग-अलग कालखंडों में धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक उपयोग में रहा है। ब्रिटिश काल से लेकर अब तक इसके संरक्षण के प्रयासों का भी इसमें जिक्र है।

मामले का ट्रांसफर और अगली सुनवाई

इस संवैधानिक प्रकरण को पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से जबलपुर प्रिंसिपल बेंच में ट्रांसफर कर दिया गया था। हालांकि, 18 फरवरी को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद प्रकरण को वापस इंदौर बेंच में ट्रांसफर कर दिया था। 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच को तीन हफ्ते के भीतर सुनवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद सर्वे के बाद की कानूनी प्रक्रिया पर लगी रोक हट गई थी।

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विनय जोशी ने बताया कि कोर्ट के निर्देशानुसार वे दो सप्ताह के भीतर ASI रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गई है, जहाँ इन आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया जाएगा।

Lokendra Mishra