उज्जैन के किसान ने जैविक खेती से 3 गुना बढ़ाई आय, खुद का ब्रांड बनाकर बेच रहे उत्पाद
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के ग्राम जैथल के किसान लोकेंद्रसिंह चौधरी ने जैविक खेती अपनाकर अपनी आमदनी को तीन गुना से भी अधिक बढ़ा लिया है। छह सालों से अपनी जमीन को रसायन मुक्त करते हुए उन्होंने न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई है, बल्कि उत्पादन भी बेहतर किया है।
उत्पादों की अग्रिम बुकिंग और खुद का ब्रांड
लोकेंद्र के खेतों में उगे अलग-अलग गुणवत्ता वाले गेहूं की 5 हजार से 13 हजार रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से पहले से ही बुकिंग हो चुकी है। बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने 'महादेव नेचुरल' नाम से अपना खुद का ब्रांड शुरू किया है। इस ब्रांड के तहत वे आटा, दाल, मसाले, कच्ची घानी तेल, दूध और घी जैसे विभिन्न खाद्य उत्पाद बनाकर खुदरा कारोबार कर रहे हैं। इस विविधतापूर्ण खेती और व्यापार से उन्हें पूरे साल आय मिल रही है।
बीमारी बनी बदलाव की वजह
किसान लोकेंद्रसिंह चौधरी ने बताया कि साल 2019 में उनके बेटे को ब्रेन हेमरेज हो गया था और परिवार के अन्य सदस्य भी अक्सर बीमार रहते थे। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने रासायनिक खाद के बढ़ते उपयोग को इसका एक बड़ा कारण बताया। इसके बाद उन्होंने 2019 से ही रासायनिक खाद का इस्तेमाल बंद कर दिया। शुरुआती दिनों में ग्रामीणों ने उनका मजाक उड़ाया, लेकिन एक-दो साल में ही जैविक खेती के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे।
लागत घटी, मुनाफा बढ़ा
जैविक खेती अपनाने से लोकेंद्र को लागत में 30-40% की कमी आई है। एक बीघा गेहूं पर जहां लगभग 5 हजार रुपए का खर्च आता है, वहीं 10-11 क्विंटल उत्पादन होता है। इसकी पहले से ही 5 हजार से 13 हजार रुपए प्रति क्विंटल पर बुकिंग हो चुकी है। औसतन 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल की कीमत पर 10 क्विंटल गेहूं से 80 हजार रुपए मिलते हैं। जबकि रासायनिक खेती से 2-3 हजार रुपए अधिक लागत लगाने पर भी 26-27 हजार रुपए ही मिल पाते थे।
आय में उल्लेखनीय वृद्धि
चौधरी के पास 25 बीघा जमीन है। पहले खरीफ और रबी दोनों सीजन से मिलाकर उनकी आमदनी 5.50 से 6 लाख रुपए होती थी। जैविक खेती के बाद यह आमदनी 12.75 लाख रुपए प्रतिवर्ष हो गई, जो सीधे दोगुना से भी ज्यादा है। गोपालन अपनाकर उन्होंने 4.50 लाख रुपए प्रतिवर्ष की अतिरिक्त आय भी शुरू की है। इससे चौधरी की कुल आमदनी अब 17 लाख रुपए के पार पहुंच गई है, जो पहले से लगभग तीन गुना है।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
लोकेंद्रसिंह चौधरी की सफलता से प्रभावित होकर उनके गांव जैथल के एक-दो अन्य किसानों ने भी जैविक खेती शुरू की। बाद में पड़ोस के मकोरा, बमोरा, उज्जैनिया और जलवा गांवों के किसान भी उनसे जुड़ गए। लोकेंद्रसिंह इन किसानों को बीज, जैविक खाद और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। परियोजना संचालक केएस कैन ने बताया कि जैथल के लोकेंद्रसिंह चौधरी से प्रेरित होकर 10-15 अन्य किसानों ने भी जैविक खेती अपनाई है। चौधरी ने अपने ब्रांड और दुग्ध उत्पादन को मिलाकर पूरे साल आय के कई स्रोत तैयार कर लिए हैं।
Bhavanesh Soni