दिग्विजय को दलित-आदिवासी CM से खुशी, भोपाल डिक्लेरेशन–2 पर खुली बहस

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दिग्विजय को दलित-आदिवासी CM से खुशी, भोपाल डिक्लेरेशन–2 पर खुली बहस

भोपाल डिक्लेरेशन–2 बैठक में दलित एजेंडा पर खुली बहस

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भोपाल डिक्लेरेशन–2 की ड्राफ्टिंग बैठक और उसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दलित एजेंडे, जमीन आवंटन और एससी-एसटी अधिकारों को लेकर खुली और तीखी बहस देखने को मिली। यह बैठक 2002 में दिग्विजय सिंह सरकार द्वारा लागू किए गए मूल भोपाल डिक्लेरेशन के 25 वर्ष पूरे होने से पहले आयोजित की गई।

दलित-आदिवासी मुख्यमंत्री पर दिग्विजय सिंह का रुख

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि यदि उनकी सरकार बनती है तो क्या दलित या आदिवासी मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पहले भी आदिवासी समाज के राजा नरेशचंद्र सिंह और अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बना चुकी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि अनुसूचित जाति या जनजाति का मुख्यमंत्री बनता है तो उन्हें खुशी होगी। दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि नेतृत्व में सामाजिक प्रतिनिधित्व लोकतंत्र को मजबूत करता है।

सज्जन सिंह वर्मा की अफसरशाही पर नाराजगी

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने 2002 के भोपाल डिक्लेरेशन, जिसे दलित एजेंडा कहा गया, के अधूरा रह जाने के लिए अफसरशाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि उस समय वे दिग्विजय सिंह की कैबिनेट में मंत्री थे और दलित एजेंडा पवित्र मन से लाया गया था, लेकिन वह अधकचरा रह गया। उनके अनुसार अधिकारियों, खासकर तहसीलदारों और पटवारियों ने इसे फेल करने में बड़ी भूमिका निभाई।

वर्मा ने कहा कि गरीब दलित-आदिवासी परिवार जहां बसे थे, वहीं उन्हें जमीन दिए जाने की शुरुआत की गई थी, लेकिन कई जगह पैसा लेकर पट्टे बनाए गए और आज भी कई परिवारों को मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। उन्होंने दावा किया कि यदि दलित एजेंडा सही तरीके से लागू होता, तो 2003 में उनकी सरकार दोबारा बन सकती थी।

दिग्विजय सिंह का जवाब और जमीन आवंटन का मुद्दा

सज्जन वर्मा की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह वर्मा का नजरिया हो सकता है, लेकिन केवल डेढ़ साल में किसी भी नीति को पूरी तरह लागू करना आसान नहीं होता। उन्होंने माना कि जमीन आवंटन सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीनों से दबंगों के कब्जे हटाकर एससी-एसटी भूमिहीनों को पट्टे देने की वजह से ग्रामीण इलाकों में उन्हें राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ा।

भोपाल डिक्लेरेशन–2 की समीक्षा और जरूरत

भोपाल डिक्लेरेशन–2 की ड्राफ्टिंग बैठक में 60 से ज्यादा विशेषज्ञों ने 2002 के डिक्लेरेशन के 21 बिंदुओं की समीक्षा की। बैठक में यह आकलन किया गया कि कितने बिंदु लागू हो पाए, कौन से बिंदु अधूरे रह गए और उनकी असफलता के कारण क्या रहे।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में संविधान और लोकतंत्र खतरे में हैं, महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है और इसका सबसे ज्यादा असर एससी-एसटी वर्ग पर पड़ रहा है। इसी कारण एक नए भोपाल डिक्लेरेशन की जरूरत महसूस की जा रही है, जो शिक्षा, रोजगार, भूमि अधिकार और आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित होगा।

संगठनों और नेताओं की भूमिका

बहुजन इंटेलेक्ट संगठन के मनोज राजे ने बताया कि 2002 में लागू हुए ऐतिहासिक भोपाल डिक्लेरेशन से एससी-एसटी वर्ग को व्यापक लाभ मिला था और उसी सफलता के आधार पर भोपाल डिक्लेरेशन–2 बनाने का फैसला हुआ है। उन्होंने कहा कि बहुजन इंटेलेक्ट, आदिवासी सेवा मंडल और डोमा परिषद मिलकर नया डिक्लेरेशन तैयार कर रहे हैं। चूंकि दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में पहला डिक्लेरेशन लागू हुआ था, इसलिए सर्वसम्मति से उनसे कार्यक्रम की अध्यक्षता का अनुरोध किया गया। राजे के अनुसार, पहले दिन की बैठक में 60 से अधिक विशेषज्ञ और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए और यह पहली ड्राफ्टिंग बैठक थी, जिसमें सुझाव जुटाए गए।

एससी-एसटी पर अत्याचार और नई पहल की मांग

विधायक फूल सिंह बरैया ने कहा कि भोपाल डिक्लेरेशन–1 से एससी-एसटी वर्ग को बड़ा लाभ मिला था, लेकिन 2003 में सरकार बदलते ही उन नीतियों को बंद कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज आदिवासियों से जल, जंगल और जमीन छीने जा रहे हैं और एससी वर्ग पर अत्याचार बढ़ गए हैं, जिससे सम्मानजनक जीवन जीना मुश्किल हो गया है। उनके अनुसार, खेत, सड़क और दफ्तर—हर जगह अत्याचार की घटनाएं हो रही हैं और एससी-एसटी कल्याण के लिए बजट का अभाव है, इसलिए डिक्लेरेशन–2 जरूरी है।

ट्राइबल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि एससी-एसटी वर्ग के अधिकार आज भी अधूरे हैं और उनके साथ अन्याय लगातार जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में अत्याचार बढ़े हैं। उनके मुताबिक यह कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि अधिकारों की लड़ाई है और सभी को एक मंच पर आकर संघर्ष को नई धार देनी होगी।

कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि एससी-एसटी वर्ग पर अत्याचार की घटनाएं चिंताजनक स्तर पर हैं और पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में पुलिस कार्रवाई तक नहीं होती और आरोपी थानों में बैठकर पीड़ितों को धमकाते हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की बात भी नहीं सुनी जा रही, इसलिए भोपाल डिक्लेरेशन–2 समय की मांग है।

निष्कर्ष

भोपाल डिक्लेरेशन–2 की इस ड्राफ्टिंग बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस में दलित-आदिवासी नेतृत्व, नीतियों के क्रियान्वयन, जमीन आवंटन और एससी-एसटी अधिकारों पर गंभीर मंथन हुआ। एक ओर अतीत की नीतियों की समीक्षा हुई, तो दूसरी ओर नए डिक्लेरेशन के जरिए शिक्षा, रोजगार, भूमि अधिकार और आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित पहल की रूपरेखा तैयार करने पर सहमति प्रकट की गई।

Janmejay Chaturvedi