दुबई में ड्रोन हमले के डर से फंसे प्रवीण कक्कड़ , वतन वापसी पर बोले- तिरंगे की छांव में रहना खुशकिस्मती

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दुबई में  ड्रोन  हमले के डर से फंसे  प्रवीण कक्कड़ , वतन वापसी पर बोले-  तिरंगे की छांव  में रहना खुशकिस्मती

दुबई में ड्रोन हमले के डर से फंसे प्रवीण कक्कड़, सुरक्षित लौटे भारत

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पूर्व ओएसडी प्रवीण कक्कड़ हाल ही में दुबई यात्रा के दौरान ईरान-इज़राइल संघर्ष के बीच अचानक बने तनावपूर्ण हालात में फंस गए थे। हालांकि, अब वह अपने साथियों के साथ सुरक्षित इंदौर लौट आए हैं।

उत्सव के माहौल पर युद्ध की छाया

कक्कड़ दुबई में एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने गए थे। इसी दौरान पाम क्षेत्र के पास ड्रोन हमले की आहट सुनाई देने से वहां माहौल अनिश्चित हो गया। कक्कड़ और उनके साथ मौजूद लोगों ने एहतियातन होटल छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने का फैसला किया। उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा कि यूएई का सुरक्षा तंत्र मजबूत है, लेकिन बारूद की आहट ने उत्सव के माहौल को अनिश्चितता में बदल दिया था। यूएई के सुरक्षा तंत्र के कारण स्थिति नियंत्रित रही और बाद में सभी सुरक्षित लौट आए।

संकट में आया वतन और परिवार याद

दुबई से लौटने के बाद कक्कड़ ने अपने अनुभवों को ब्लॉग के रूप में साझा किया है। उन्होंने लिखा कि संकट के समय इंसान को सबसे ज्यादा अपने घर, परिवार और वतन की याद आती है। कक्कड़ के साथ संजय शुक्ला, विशाल पटेल, पिंटू छाबड़ा, गोलू पाटनी, संजय अग्रवाल और मनीष सहारा भी सुरक्षित इंदौर लौटे हैं। उन्होंने अपनी अनिश्चित रातों में भारत में होने वाले होलिका दहन को याद किया और इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बताया। उनके अनुसार आज के दौर की "होलिका" युद्ध और नफरत के विचार हैं, जिन्हें समाप्त होना चाहिए।

परदेस में समझा वतन की सुरक्षा का महत्व

कक्कड़ ने अपने ब्लॉग में लिखा कि जब आप विदेश में फंसे हों और उड़ानों को लेकर अनिश्चितता हो, तब समझ आता है कि अपने देश की सुरक्षा और स्थिरता कितनी बड़ी बात है। उन्होंने एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को अपने देश लौटने का इंतजार करते देखा और भारत सरकार की सक्रियता से लोगों में भरोसा बना हुआ था। वतन लौटने के बाद होली का माहौल उनके लिए खास बन गया, क्योंकि जो लाल रंग वहां खतरे का संकेत था, वही घर आकर प्रेम का प्रतीक बन गया। उनके अनुसार संकट के बाद सुरक्षित घर लौटना ही जीवन का सबसे बड़ा उपहार है।

L. N. Bhargava